अनुपमा हत्याकांड: पत्नी के किए थे 72 टुकड़े, हत्यारे पति की सजा को नैनीताल HC ने रखा बरकरार

नैनीताल।हाई कोर्ट ने देहरादून के चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड मामले में आजीवन की सजा काट रहे अनुपमा के पति साफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी की अपील पर सुनवाई की। न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने निचली अदालत के गुलाटी को आजीवन कारावास की सजा से संबंधित संबंधित निर्णय काे बरकरार रखा है।
मामला अक्टूबर 2010 का है। दिल्ली के रहने वाले राजेश गुलाटी और ओडिशा की अनुपमा ने 1999 में शादी की थी। दोनों पहले अमेरिका चले गए थे, लेकिन 2008 की आर्थिक मंदी में राजेश की नौकरी चली गई, तो वे भारत लौट आए और देहरादून में बस गए। बाद में राजेश को देहरादून की एक छोटी कंपनी में इंजीनियर की नौकरी मिली, लेकिन इसके बाद दंपति के रिश्ते खराब हो गए और झगड़े बढ़ गए।
हत्या के बाद शव के किए 72 टुकड़े
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 अक्टूबर 2010 की रात को झगड़े के दौरान राजेश ने अनुपमा को थप्पड़ मारा। इससे अनुपमा का सिर दीवार से टकराया और वह बेहोश हो गई। डर के मारे कि कहीं वह होश में आकर शिकायत न कर दे, राजेश ने उसकी हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, बाद में राजेश ने इलेक्ट्रिक आरी और डीप फ्रीजर खरीदा, शव को 72 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक बैग्स में रखकर फ्रीजर में छिपा दिया। धीरे-धीरे इन टुकड़ों को देहरादून के सुनसान इलाकों में फेंकता रहा।
2017 में देहरादून की अदालत ने राजेश को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जिसके बाद राजेश गुलाटी ने निचले अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। 8 साल चले सुनवाई के बाद बुधवार को जस्टिस रविंद्र मैथानी और जस्टिस आलोक महरा की बेंच ने उसकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
राजेश गुलाटी ने की थी लव मैरिज
सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने 1999 में अनुपमा से लव मैरिज की थी। शादी के 11 साल बाद पारिवारिक क्लेश में इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया। राजेश और अनुपमा की मुलाक़ात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए 1992 में हुई थी। दोनों दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में मिले थे। सात साल के अफेयर के बाद दोनों ने 10 फ़रवरी 1999 को शादी कर ली। सन 2000 में राजेश और अनुपमा अमेरिका शिफ्ट हो गए। लेकिन वहां अनबन शुरू होने की वजह से अनुपमा 2003 में इंडिया लौट आई। लेकिन 2005 में राजेश उसे मनाकर फिर अमेरिका ले गया। इस बीच अनुपमा ने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। 2008 में आर्थिक मंदी की वजह से परिवार इंडिया लौट आया। लेकिन दोनों के बीच अनबन जारी रही। इसके बाद परिवार ने दोनों को देहरादून में बसने की सलाह दी।
हत्या के बाद किया ये काम
राजेश ने प्रकाश नगर में ओमप्रकाश मित्तल का घर किराए पर लिया और रहने लगे। लेकिन यहां भी दोनों के बीच का झगड़ा घरेलू हिंसा और संरक्षण अधिकर्ताक पहुंच गया। राजेश को वहां से फटकार लगाई गई और उसे अनुपमा को 20 हजार रुपए महीने देने का आदेश दिया गया। एक महीने तो राजेश ने रुपए दिए, लेकिन 17 अक्टूबर 2010 को दोनों के बीच फिर झगड़ा हुआ और राजेश ने अनुपमा को बेरहमी से मार डाला। इसके बाद बाद वह बाजार से इलेक्ट्रिक आरी और डीप फ्रीजर खरीदकर लाया।
दो माह तक फ्रीजर में रखा शव
बच्चों ने जब मां के बारे में पूछा तो बताया कि वह नानी के घर चली गई हैं। हालांकि बच्चों को पता था कि मां डीप फ्रीजर में हैं। राजेश बच्चों को घुमाने के बहाने शव के टुकड़ों को अलग-अलग जगह फेंकता रहा। इस बीच जब अनुपमा के घर वालों से उसकी बात नहीं हुई तो शक हुआ। अनुपमा के भाई ने अपने एक दोस्त को पता करने के लिए कहा। भाई का दोस्त 11 दिसंबर को पासपोर्ट कर्मचार बनकर जब घर पहुंचा तो उसने बताया कि अनुपमा दिल्ली में हैं। इसके बाद राजेश पर दबाव बढ़ता चला गया और उसे पता था कि अब जल्द ही पोल खुलने वाली है। उसने विदेश भागने की तैयारी शुरू कर दी। वह पूरी पैकिंग कर चुका था। तभी 12 दिसंबर को अनुपमा का भाई पुलिस के साथ पहुंचा। पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर जब पूछताछ शुरू की तो पूरा खुलासा हुआ।








