…और टूटे मोटर मार्ग को सुधारने में जुट गये रतगांव के ग्रामीण

  • गत दो दिनों से ग्राम प्रधान महिपाल सिंह की अगुवाई में बड़ी संख्या में श्रमदान कर रहे युवा और प्रवासी

थराली से हरेंद्र बिष्ट।

कोरोना महामारी और ऐसे में आसमान से लगातार बरस रहे आफत के मेघों से अधिकांश क्षेत्रों में हालात बद से बदतर बने हुए हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते हो रहे भूस्खलन के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त है। भूस्खलन से कई मुख्य सड़कें व संपर्क मार्ग बंद होने से लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवागमन नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले में स्थानीय प्रशासन व जिम्मेदार महकमे के हाथ खड़े कर से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। मुसीबत की इस घड़ी में कई जगह कोरोना संकट के चलते वापस लौटे प्रवासी मददगार बन कर आगे आ रहे हैं।
ऐसी ही एक तस्वीर विकासखंड थराली के दूरस्थ क्षेत्र रतगांव से सामने आई है। गांव लौटे तमाम प्रवासियों व अन्य ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त मोटर मार्ग को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। ग्राम प्रधान महिपाल सिंह की अगुवाई में गांव के 40 से अधिक युवा व प्रवासी पिछले दो दिन से क्षतिग्रस्त सड़क को ठीक करने में जुटे हुए हैं। दरअसल 15 दिन पहले हुई भारी बारिश के कारण थराली विकासखंड के सोल क्षेत्र में भारी तबाही मची थी। लोगों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि बारिश व मलबे में बह गई है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा।
इससे क्षेत्र की लाइफलाइन माने जाने वाला थराली- डूंगरी- रतगांव मोटर मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया था। ढाडरबगड़ से रतगांव को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत बनी सड़क भी मलबा आने व भूस्खलन होने के कारण पांच जगहों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। ढाडरबगड़ के पास करीब 50 मीटर सड़क धंसकर नदी में समा गई। यहां पर पैदल आवाजाही के लिए भी रास्ता नहीं बचा है। लोग अपनी जान हथेली पर रखकर आवाजाही कर रहे हैं।

बुंगा स्लाइडिंग जोन व आसपास भी ऊपर से लगातार भारी मलबा गिर रहा है। मोटर मार्ग बंद होने से तीन  हजार से अधिक आबादी वाले रतगांव के लोगों को विकासखंड मुख्यालय आने तक भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को डंडी के सहारे थराली तक पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन व पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से कई बार बंद पड़े मोटर मार्ग को खोलने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन विभागीय अधिकारी बहाने बनाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।
ऐसे में कोरोना महामारी के कारण वापस लौटे प्रवासियों ने गांव के अन्य लोगों के साथ मिलकर बंद मोटर मार्ग को ठीक करने की ठानी है। ग्राम प्रधान महिपाल सिंह ने बताया कि सड़क के छह किलोमीटर वाले हिस्से में कई जगह स्लाइडिंग हो रखी है। कई दुपहिया और चौपहिया वाहन फंसे हुए हैं। लोगों को आवागमन करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बताया कि 40 से अधिक ग्रामीण पिछले दो दिन से क्षतिग्रस्त मोटर मार्ग को ठीक करने में जुटे हुए हैं। कोशिश की जा रही है कि क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द ठीक किया जाए।
हालांकि संसाधन कम होने से निर्माण कार्य करने में मुश्किलें भी आ रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता से उनकी वार्ता हुई है। संबंधित अधिकारी द्वारा भरोसा दिया गया है कि क्षतिग्रस्त मोटर मार्ग को खोलने में जितने भी ग्रामीण जुटे हुए हैं उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। बहरहाल महकमा अपने आश्वासन के अनुरूप निर्माण कार्य में जुटे ग्रामीणों को भुगतान करता है या नहीं, यह तो आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएगा। 

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