धोखेबाज चीन ने अब लद्दाख के देपसांग क्षेत्र में तम्बू गाड़े!

रिपोर्ट में दावा

  • चीन ने पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी और देपसांग सेक्टर के पास भी बड़ी संख्या में तैनात किये सैनिक
  • लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून की रात हिंसक झड़प हुई थी, इसमें शहीद हुए थे भारत के 20 जवान

नई दिल्ली/लेह। भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। चीनी सेना की हलचल अब देपसांग सेक्टर में भी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि चीन के सैनिक यहां घुसपैठ की कोशिश में हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) हवाई पट्टी से 30 किलोमीटर और देपसांग से 21 किलोमीटर दूर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात कर दिये हैं। यहां कैम्पों में सैन्य गाड़ियां और तोपें भी पहुंचने लगी हैं।
चीन इस इलाके में पेट्रोलिंग प्वाइंट 10 से 13 के बीच भारतीय सेना के लिए मुश्किल खड़ी करना चाहता है। वह कराकोरम दर्रे के पास के इलाकों में कब्जा करना चाहता है, ताकि उसे पाकिस्तान जाने वाले हाईवे के लिए रास्ता मिल जाए। भारत ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण को रोक दिया था। इससे पहले चीन और भारत के बीच गलवान घाटी, पैंगोग सो और हॉट स्प्रिंग्स इलाके में तनाव जारी है।
लद्दाख की गलवान घाटी में 10 दिन पहले भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद एक सैटेलाइट इमेज से नया खुलासा हुआ है। इस हाई रेजोल्यूशन इमेज में गलवान नदी के आसपास लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएली) के दोनों ओर चीनी सेना के कई निर्माण या कैम्प साफ तौर पर दिखाई दिए हैं। रिपोर्ट में इस दावे से जुड़ी तस्वीर जारी की गईं। गलवान घाटी में 15 जून की रात हिंसक झड़प में हमारे 20 जवान शहीद हो गए थे, जबकि चीन के कमांडिंग अफसर समेत करीब 40 सैनिक मारे गए। हालांकि चीन ने अपने हताहत सैनिकों के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है।
यह हाई रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेज गलवान घाटी के पेट्रोल प्वाइंट-14 की है। 22 मई को ली गई एक इमेज में गलवान घाटी में एलएसी के नजदीक सिर्फ एक टेंट नजर आ रहा है। लेकिन इसके बाद ली गई दूसरी इमेज में एलएसी के पास चीनी सेना की मौजूदगी और उसके निर्माण साफतौर पर नजर आए। जो 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद एकाएक नदारद भी हो गए। यहीं पर 16 जून को ली गई एक अन्य तस्वीर में चीन के बुल्डोजर भी दिखे। लद्दाख की गलवान घाटी में चीन की सेना ने भारतीय जवानों पर हमले से पहले एलएसी के आसपास भारी मात्रा में साजो सामान जुटाया था।

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