केदारनाथ : दैवीय आपदा की भेंट चढ़े लोगों के कंकालों का तलाशी अभियान फिर शुरू

  • चार दिवसीय सघन खोजबीन अभियान के लिए टीम गठित, डीएनए सैंपल लेकर करेंगे अंतिम संस्कार

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में दैवीय आपदा में लापता और मारे गए लोगों के कंकालों की खोजबीन के लिए पुलिस आज बुधवार से दोबारा सघन खोजबीन अभियान शुरू कर रही है।
गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग समेत क्षेत्र के अन्य ट्रैकिंग रूट पर आज बुधवार से शुरू किए जाने वाले चार दिवसीय सघन खोजबीन अभियान के लिए पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में दस टीमों का गठन किया गया है। टीम में स्थानीय लोगों को भी शामिल किया गया है। सर्च अभियान के दौरान मिलने वाले कंकालों के सैंपल लेने के बाद विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गौरतलब है कि 16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में हजारों लोग मारे गए थे। रेस्क्यू दलों द्वारा चार हजार से अधिक शव बरामद किए गए थे, लेकिन कई लोगों का पता नहीं चल पाया है। नर कंकालों की खोजबीन के लिए बीते छह वर्षों में शासन द्वारा कई सर्च अभियान चलाए जा चुके हैं, जिसमें 600 से अधिक कंकाल मिले थे। आज बुधवार से दोबारा पुलिस द्वारा कंकालों की खोजबीन शुरू की जा रही है। इसके लिए पुलिस और एसडीआरएफ द्वारा संयुक्त रूप से दस टीमों के माध्यम से सर्च अभियान चलाया जाएगा।

टीमों द्वारा केदारनाथ-वासुकीताल, केदारनाथ-चोराबाड़ी, त्रियुगीनारायण-गरुड़चट्टी-केदारनाथ, कालीमठ-चौमासी-खाम-केदारनाथ, जंगलचट्टी व रामाबाड़ा का ऊपरी क्षेत्र केदारनाथ बेस कैंप का ऊपरी क्षेत्र समेत मंदिर के आसपास के क्षेत्र, भैरवनाथ मंदिर व आसपास का क्षेत्र, गौरीकुंड-गोऊंमुखड़ा, गौरीकुंड से मुनकटिया का ऊपरी क्षेत्र सहित सोनप्रयाग में तलाशी अभियान चलाते हुए नर कंकालों की खोजबीन की जाएगी।
टीम में रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी गढ़वाल से सात उप निरीक्षक व 20 आरक्षी के साथ एसडीआरएफ के तीन उप निरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी और 19 आरक्षी शामिल हैं। साथ ही रुद्रप्रयाग जिले से 10 फार्मेसिस्ट भी टीम में हैं। प्रत्येक टीम में उप निरीक्षक समेत पुलिस व एसडीआरएफ के दो-दो आरक्षी और एक फार्मेसिस्ट को रखा गया है। टीमों को रात्रि प्रवास की सामग्री स्लीपिंग बैग समेत सुरक्षा उपकरण और वीडियोग्राफी के लिए कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं। 
पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि चार दिवसीय विशेष अभियान के लिए दस टीमें गठित की गई हैं। टीमों में स्थानीय युवाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे सर्च टीम को ट्रैकिंग रूटों की सही जानकारी मिल सके। खोजबीन में मिलने वाले कंकालों का डीएनए लेकर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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