EVM की जांच के लिए चुनाव आयोग को मिलीं आठ ऐप्लिकेशन, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों के नतीजों के ऐलान के बाद ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर चुनाव आयोग को आठ याचिकाएं मिली हैं। ये याचिकाएं बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक ने दायर की है।

महाराष्ट्र के अहमदनगर से बीजेपी के उम्मीदवार सुजय विखे पाटिल ने 40 मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों की वेरिफिकेशन की मांग की है। दरअसल विखे पाटिल इस सीट से एनसीपी (शरद पवार) के निलेश लंके से हार गए थे। चुनाव आयोग की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में YSRCP और तमिलनाडु में डीएमके के उम्मीदवारों ने भी ईवीएम की जांच के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। चुनाव आयोग के मुताबिक, छह राज्यों की आठ संसदीय सीटों पर ईवीएम की जांच के लिए याचिकाएं दायर की गई हैं। कुल मिलाकर 92 मतदान केंद्रों की मशीनों की जांच की मांग की गई है।

वहीं, तमिलनाडु के वेल्लोर और तेलंगाना की जहीराबाद सीटों से बीजेपी उम्मीदवारों ने ईवीएम की जांच की मांग के लिए याचिका दायर की है। इसके साथ ही हरियाणा की करनाल और फरीदाबाद सीट, छत्तीसगढ़ की कांकेर सीट से कांग्रेस उम्मीदवारों ने ईवीएम जांच की मांग की है। चुनाव आयोग की ओर से एक जून को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, चुनावी नतीजों में दूसरे या तीसरे स्थान पर आए उम्मीदवारों को ईवीएम की जांच के लिए 47000 रुपये का भुगतान करना होगा। ये रकम ईवीएम बनानी वाली कंपनियों BEL और ECIL को दी जाएगी, जो ईवीएम की जांच करेंगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल को ईवीएम में हेरफेर की आशंका को निराधार बताते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग को खारिज कर दिया था। हालांकि, यह फैसला सुनाते हुए जस्टिस खन्ना ने कहा था कि वीवीपैट वेरिफिकेशन का खर्चा उम्मीदवारों को खुद ही उठाना पड़ेगा। अगर किसी स्थिति में ईवीएम में छेड़छाड़ पाई गई तो खर्च वापस दिया जाएगा।

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