उत्तराखंड: बुझ गए ​तीन घरों के इकलौते चिराग, रुला देगी शहीदों के परिवार की कहानी

देहरादून। उत्तराखंड के 5 जवानों ने जम्मू कश्मीर के कठुआ में हुए आतंकी हमले में देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी है। इन शहीदों में नायब सूबेदार आनंद सिंह, ग्राम कंडाखाल, रुद्रप्रयाग, हवलदार कमल सिंह, ग्राम पापरी, पौड़ी गढ़वाल, नायक विनोद सिंह, ग्राम चौंद जसपुर, टिहरी गढ़वाल, राइफलमैन अनुज नेगी, ग्राम डोबरिया, रिखड़ीखाल, पौडी गढ़वाल, राइफलमैन आदर्श नेगी,थाती डागर, टिहरी गढ़वाल शामिल हैं।

पांचों शहीदों को आज सैन्य सम्मान के के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीदों को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा। इस दौरान भारत माता की जय, शहीद अमर रहे के नारों से देवभूमि गूंज उठी। पांचों शहीदों के घरों में कोहराम मचा हुआ है। लैंसडौन निवासी हवलदार कमल सिंह, टिहरी गढ़वाल निवासी नायक विनोद सिंह, रिखणीखाल निवासी राइफलमैन अनुज नेगी घर के इकलौते चिराग भी थे।

विनोद तीन बहनों के इकलौते भाई

अठुरवाला भनियावाला निवासी विनोद भंडारी (33) पुत्र बीर सिंह भंडारी जो कि तीन बहनों के अकेले भाई थे। उनका एक चार साल का बेटा और एक तीन माह की बेटी है। बेटी के जन्म पर वो घर पर ही थे। करीब दो माह पहले ही वो वापस गए थे। विनोद सिंह मूल रूप से जाखणीधार, टिहरी के थे। नायक विनोद सिंह के पिता बीर सिंह भंडारी खुद भी फौज में रहे हैं।

रिखणीखाल के अनुज भी घर के इकलौते बेटे, एक बहन

रिखणीखाल के डोबरिया (पोस्ट धामधार) निवासी राइफलमैन अनुज नेगी भी घर के इकलौते बेटे थे। उनकी एक बहन भी है। उनके पिता भारत सिंह वन विभाग में दैनिक कर्मचारी थे। मां सरिता देवी गृहिणी हैं। अनुज का आठ माह पूर्व बीते नवंबर में विवाह हुआ था। गर्मियों की छुट्टियों में वह घर आए थे और मई के अंत में ड्यूटी पर लौटे थे।

कमल घर के इकलौते बेटे थे, उनकी तीन बहनें

कोटद्वार रिखणीखाल के नौदानू (पापड़ी) ग्राम निवासी हवलदार कमल सिंह (35) भी आतंकी हमले में शहीद हो गए। वह घर के इकलौते बेटे थे। उनकी तीन बहनें हैं। तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। पिता के देहांत के बाद घर पर उनकी माता और दादी रहती हैं।शहीद कमल की पत्नी रजनी अपनी दो बेटियों 10 साल की अंशिका व चार साल की अनिका के साथ कोटद्वार में रह रही हैं। इसी साल कमल ने कोटद्वार के पदमपुर सुखरो में किराये पर लिया था। जो जून में ही परिवार से मिलकर गए थे। कमल सिंह बीते 20 जून को गांव में संपन्न हुई पूजा में हिस्सा लेकर कुछ दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे।

तीन भाई बहन में सबसे छोटा आदर्श

26 वर्षीय राइफलमैन आदर्श नेगी टिहरी जिले के कीर्तिनगर ब्लॉक के थाती डागर गांव के रहने वाले थे। उनके पिता दलबीर सिंह नेगी गांव में ही खेतीबाड़ी का काम करते हैं। आदर्श ने बारहवी तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज पिपलीधार से हुई। 2019 में वह गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हो गए। उस दौरान वह गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी द्वितीय वर्ष थे। आदर्श तीन भाई बहन में सबसे छोटे थे। उनकी बहन की शादी हो चुकी है और भाई चेन्नई में नौकरी करता है। वह इसी साल फरवरी में अपने ताऊ के लड़के की शादी में घर आए थे।

आनंद के बड़े भाई और मां गांव में ही रहती

रुद्रप्रयाग के कांडाखाल गांव निवासी बलिदानी नायब सुबेदार आनंद सिंह रावत के का परिवार देहरादून के गुजरोंवाली कृष्णा विहार-शिवलोक कालोनी में रहता है। उनके बड़े भाई और मां गांव में ही रहती है। देहरादून में उनकी पत्नी विजया रावत और दो बच्चे रहते हैं। यहां पर उन्होंने तीन साल पहले ही घर बनाया था। पति के शहीद होने की सूचना मिलते ही पूरा परिवार पैतृक गांव के लिए रवाना हुआ।

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