मुख्यमंत्री धामी के तीन साल पूरे, जानिए वो ऐतिहासिक फैसले जो बने नजीर…

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के रूप में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। तीन साल का कार्यकाल पूरे होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की जनता का आभार प्रकट किया है। इसके साथ ही सीएम धामी ने केंद्रीय नेतृत्व का भी आभार प्रकट किया है।

बता दें कि साल 2021 में तत्कालिन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस्तीफा के बाद 4 जुलाई 2021 को पुष्कर सिंह धामी को नेता सदन चुना गया था। मुख्यमंत्री बनते ही पुष्कर सिंह धामी ने त्रिवेंद्र सरकार के देवस्थान प्रबंधन बोर्ड को समाप्त किया था। क्योंकि उस दौरान चारधाम के तीर्थपुरोहित, हक हकूकधारी समेत पंडा समाज, चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का विरोध कर थे, जिसको देखते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस बोर्ड को भंग कर दिया था। इसके अलावा साल 2021 में विधानसभा बजट सत्र के दौरान तात्कालिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कमिश्नरी बनाने की घोषणा को भी सीएम त्रिवेंद्र वापस ले लिया था।

1. धर्मांतरण विरोधी कानून:- उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिये एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया। अब प्रदेश में जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने या करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।

2. समान नागरिक संहिता:- उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधेयक लागू किया गया। इससे सभी को समान अधिकार मिलेंगे।

3. नकल विरोधी कानून:- प्रदेश में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया। इस कानून के लागू होने के बाद पारदर्शिता के साथ समय पर परीक्षाएं संपन्न हो रही हैं।

4. दंगारोधी कानून:- प्रदेश में दंगारोधी कानून को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। अब दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही दंगे में होने वाली सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई भी दंगाइयों से ही की जाएगी। इसके लिए क्लेम ट्रिब्यूनल का गठन कर दिया गया है।

      5. लैंड जिहाद:- लैंड जेहाद पर कार्यवाही करके देवभूमि उत्तराखंड में सुख, शांति और अमन-चैन सुनिश्चित किया है। लैंड जिहाद के तहत की गई कार्यवाही के दौरान प्रदेश में करीब 5 हजार एकड़ सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है।

      6. महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण:- प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सरकारी नौकरी में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। इससे महिला सशक्तिकरण को और अधिक बल मिलेगा।

      7. राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण:- लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके सभी आश्रित पात्रों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया।

          8. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं:- राज्य में निःशुल्क जांच योजना के तहत मरीजों को 207 प्रकार की पैथेलॉजिकल जांचों की निःशुल्क सुविधा दी जा रही है। हरिद्वार में सुविधायुक्त मेडिकल कॉलेज का निर्माण प्रगति पर। ऊधमसिंह नगर जिले में एम्स ऋषिकेश का सैटेलाईट सेंटर का कार्य गतिमान है।

          9. आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना:- उत्तराखंड में इस योजना के तहत 55 लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाएं जा चुके हैं, जिसमें से 9 लाख 11 हजार मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है, इस पर 1,720 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

          10. छात्रों को छात्रवृत्ति:- उत्तराखंड नई शिक्षा नीति को सबसे पहले लागू करने वाला राज्य बना। प्रदेश में मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत कक्षा 6वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है।

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