सुप्रीम कोर्ट का हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा पर बड़ा फैसला, दो आरोपियों की जमानत रद्द

हल्द्वानी।उत्तराखंड के बहुचर्चित बनभूलपुरा हिंसा कांड में कानूनी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले के 2 मुख्य आरोपितों को मिली ‘डिफॉल्ट बेल’ को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई त्रुटियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपितों जावेद सिद्दीकी व अरशद अयूब को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
दो मुख्य आरोपियों को सरेंडर के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा दंगे के दो मुख्य आरोपियों को सरेंडर के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने दो मुख्य आरोपियों की डिफॉल्ट बेल खारिज कर दी है। SC ने दिए दो हफ्ते के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब UAPA के तहत आरोपी
राज्य सरकार ने विशेष याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में दोनों की बेल को चुनौती दी थी। जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब दोनों पर दंगे भड़काने, साजिश रचने के आरोप हैं। दोनों जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब UAPA के तहत आरोपी हैं। नैनीताल हाईकोर्ट से दोनों को डिफॉल्ट बेल मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट ने माना गंभीर त्रुटि
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट ने तथ्य और कानून दोनों के स्तर पर गंभीर त्रुटि की है। कोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी पर सुस्ती का आरोप लगाना उचित नहीं था, क्योंकि मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए जांच तेजी से की जा रही थी। रिकॉर्ड के अनुसार, 90 दिनों के भीतर 65 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जबकि हाईकोर्ट ने इसे मात्र 12 गवाहों तक सीमित मानकर टिप्पणी की थी।
ये है मामला?
मामला 8 फरवरी 2024 का है जब हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में हुई थी हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसानहुआ था। हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में हुई भीषण हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति के विनाश से जुड़ा हुआ है। इस उपद्रव के दौरान पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया था और पुलिसकर्मियों पर हमले हुए थे। मामले की गंभीरता के दृष्टिगत आरोपितों के विरुद्ध यूएपीए (UAPA) जैसी कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।








