देहरादून। उत्तराखंड में पहली बार शीतकाल में भी चारधाम यात्रा होने जा रही है। सप्त दिवसीय शीतकालीन तीर्थ यात्रा की जल्द ही शुरूआत होने जा रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सोमवार को मुलाकात कर ज्योतिर्मठ के एक प्रतिनिधि मंडल ने आमंत्रण पत्र भी दिया है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री धामी ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शीतकालीन तीर्थयात्रा ऐतिहासिक होगी। आदिगुरु शंकराचार्य के ढाई हजार वर्ष पूर्व स्थापित परंपराओं का निर्वहन करते हुए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य शीतकालीन पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। आदिगुरु शंकराचार्य परंपरा के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब ज्योतिषपीठ के आचार्य चारधामों के पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, उनकी तीर्थ यात्रा से चारधामों में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

27 दिसंबर से शुरू होगी शीतकाल चारधाम यात्रा…

27 दिसंबर से शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू होगी। बता दें कि 28 और 29 दिसंबर को यात्रा उत्तरकाशी पहुंचेगी, 30 दिसंबर को भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा स्थली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी, 31 दिसंबर को बद्रीकाश्रम हिमालय पहुंचेगी, एक जनवरी को ज्योतिर्मठ और दो जनवरी को हरिद्वार में रात्रि-विश्राम करेंगे। इसके पीछे की वजह शीतकाल चार धाम यात्रा को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।

बता दें कि हिंदू मान्यता के अनुसार उत्तराखंड के चार धामों में शीतकाल के छह महीने देवता पूजा पाठ करते हैं। इसलिए बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री चारों धामों के कपाट छह महीने के लिए बंद हो जाते हैं। इस दौरान उनके गद्दीस्थलों पर पूजा की जाती है।

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