सुद्धोवाला जेल में तैयार हो रहे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले औषधीय पौधे

  • बागवानी में कैदियों को किया जा रहा पारंगत
  • 30 बीघा भूमि में औषधीय व 8 बीघा में लेमन ग्रास व आंवला लगाए हैं पौधे
  • कैदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने का मकसद

देहरादून। कैदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए नित नये प्रयास किए जा रहे हैं। देहरादून की सुद्धोवाला जेल में कोरोना महामारी के दौरान कैदियों और जेल स्टाफ में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए औषधीय पौधे लगाए गए। प्रदेश के अन्य जेलों में भी औषधीय पौधे लगाने की तैयारी चल रही है। दरअसल उत्तराखंड कोरोना की पहली लहर में 120 और दूसरी लहर में 20 कैदी और स्टाफ कोरोना संक्रमित हो गए थे। देहरादून की सुद्धोवाला जेल में आधा बीघा भूमि पर 30 प्रजाति के औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इनमें अधिकतर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले हैं। यहां शमी, अपामार्ग, कपूर, कामिनी, मुलहठी, शतावरी बेल, भृंगराज, देसी अकरकरा, सर्पगंधा, पत्थरचट्टा, पिपरमेंट, स्टीविया, जैसमीन, नीम, अजवाइन, कढ़ी पत्ता, मेंहदी, बड़ी तुलसी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, अनार, रात की रानी, लहसुन बेल, मोगरा, हरसिंगार, पीपली, छुईमुई आदि प्रजाति के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा आठ बीघा भूमि में लेमन ग्रास के साथ आंवला के पौधे लगाए गए हैं। लेमन ग्रास लगाने के पीछे मंशा दोहरा लाभ लेने की है। लेमनग्रास जहां सेहत के लिए फायदेमंद होता है, इससे जेल में ही फिनाइल भी तैयार किया जाएगा।
जेलर पवन कोठारी ने बताया कि जेल में लगाए गए औषधीय पौधों का सेवन कैदी व स्टाफ सुबह की चाय, दोपहर व शाम के भोजन और काढ़ा के रूप में कर पाएंगे। इसके अलावा कैदियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को सुबह-शाम योगाभ्यास कराया जा रहा है। ताकि कैदी व स्टाफ कोरोना से लड़ने के लिए पूरी तरह फिट रह सकें।
जेल में तैयार किए गए मास्क
कोरोना संक्रमण को देखते हुए कुछ कैदियों को मास्क बनाने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया है। जेलर पवन कोठारी बताते हैं कि कोरोनाकाल में बाहर से मास्क लेने की जरूरत नहीं पड़ी। कैदियों ने अब तक करीब पांच हजार मास्क तैयार किए हैं, जो कि कैदियों व जेल स्टाफ में बांटे गए। सुद्धोवाला जेल के वरिष्ठ अधिक्षक दधीराम का कहना है कि जेल में औषधीय पौधों की खेती करने का एक फायदा यह भी है कि कैदी बागवानी में पारंगत हो जाएंगे। जो कैदी सजा पूरी करके घर लौटेंगे, उन्हें बागवानी का पूरा ज्ञान होगा और वह घरों में भी औषधीय पौधे लगा सकेंगे।

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