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सियासत का खेल

  • कांग्रेस हाईकमान ने हरदा को पंजाब के प्रभारी पद से किया मुक्त और हरक ने ‘बड़े भाई’ से मांगी माफी
  • बैकफुट पर नजर आए हरक और कहा, हरीश मेरे बड़े भाई और मैं उनके चरणों में नतमस्तक
  • हरीश रावत मुझे चोर कहें, अपराधी कहें, वे मेरे बड़े भाई रहेंगे, उनका हर शब्द हमारे लिए आशीर्वाद

देहरादून। आज शुक्रवार को प्रदेश में दो सियासी घटनाक्रम सामने आये हैं। पहले घटनाक्रम में कांग्रेस हाईकमान ने हरीश रावत की मंशा को पूरा करते हुए उन्हें पंजाब के प्रभारी पद से मुक्त कर दिया। माना जा रहा है कि अब वह उत्तराखंड में फ्री-हैंड होकर ‘बैटिंग’ करेंगे। हालांकि अब तक हरदा कहते रहे हैं कि कांग्रेस के दरवाजे किसी के लिये बंद नहीं हैं, लेकिन कुछ लोग जब तक अपने करमों की माफी नहीं मांगेंगे तब तक उनको एंट्री नहीं दी जाएगी। दूसरे घटनाक्रम में आज शुक्रवार को ही हरक सिंह रावत ने अपने स्वभाव के खिलाफ एक नया रूप दिखाया है और एक सुलझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह हरीश रावत को बड़ा भाई बताते हुए उनसे नतमस्तक होकर माफी मांगी है।

इन दोनों घटनाक्रम के बाद सियासी गलियारों में अब यह चर्चा जोरों से तैरने लगी है कि दोनों ‘रावत’ अब उत्तराखंड की राजनीति में नया गुल खिलाने जा रहे हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने खुले मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर बहुत कड़ी और तीखी राजनीतिक टिप्पणी की थी और अनेक गंभीर आरोप भी लगाए थे।
आज बदले सियासी घटनाक्रम में फिर हरक बैकफुट पर नजर आए और उन्होंने बड़े सधे हुए शब्दों में मासूमियत से कहा कि हरीश रावत मेरे बड़े भाई हैं और उनके चरणों में नतमस्तक हूं। हरीश रावत जी मुझे चोर कहें, अपराधी कहें, वे मेरे बड़े भाई थे, हैं और रहेंगे। उनका हर शब्द हमारे लिए आशीर्वाद है। हरक के इस बयान के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं और यह भी कयास लगाया जा रहा है कि वह पुन: ‘घर’ वापसी कर सकते हैं।


कांग्रेसी दिग्गज हरदा पंजाब के साथ ही उत्तराखंड में खासे सक्रिय रहे हैं। उत्तराखंड में आने वाले विस चुनाव को देखते हुए वह चाहते थे कि हाईकमान उन्हें पंजाब और चंडीगढ़ के प्रभारी पद से मुक्त कर दे। इस बारे में उन्होंने खुलकर अपनी बात की और कहा कि पंजाब की वजह से उत्तराखंड को पूरा वक्त नहीं दे पा रहे हैं। अब हाईकमान ने उन्हें प्रभारी पद से मुक्त कर दिया है। माना जा रहा है कि हरदा अब उत्तराखंड में फ्री-हैंड बैटिंग करेंगे। वैसे भी हरदा उत्तराखंड की कमान अकेले ही संभाल रहे हैं। लोगों की कांग्रेस में एंट्री को लेकर उन्होंने फेसबुक पर अपनी बात की थी। हरदा ने लिखा है कि कुछ विधायक और मंत्री कांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए बड़ी व्यग्रता और जोर-जोर से हर संभव उपायों से दरवाजा खटखटा रहे हैं। हमारे दरवाजे बंद नहीं हैं, मगर कुछ लोग जिन्होंने भाजपा की कुगत की है उनको कांग्रेस में लेने में हमें संकोच जरूर है। फिर जिन कार्यकर्ताओं ने 2017 की भीषणतम राजनीतिक आपदा से उबार कर कांग्रेस को इस लायक बनाया है कि कांग्रेस पार्टी में आने के लिये भाजपा में भगदड़ मची हुई है तो आखिर उन कार्यकर्ताओं का हित भी तो देखना पड़ेगा। यहां हमारे पास चुनावी समर में विजय होने की संभावनाओं वाले लोग हैं। उन क्षेत्रों में हम उन कार्यकर्ताओं के हित को संरक्षित करेंगे। पार्टी को अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर भरोसा है।
हरदा ने लिखा.. ‘हम भाजपा नहीं हैं जो पैसों से खरीदकर के भी दल-बदल करवाएं और अपने कार्यकर्ताओं का गला काटने में संकोच न करें। कांग्रेस पार्टी उन्हीं लोगों को पार्टी में शामिल कर रही है जिनका स्वागत करने के लिए कार्यकर्ताओं की बांहें भी आगे बढ़ी हुई हैं।

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