इससे पहले कोरोना से बिगड़ें हालात, मुख्यमंत्री ने बदले ‘सिपहसालार’!

  • नए स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी के आते ही कोविड-19 हराने को बनी नई रणनीति
  • महकमे के अफसर अभी तक दफ्तरों में बैठकर ही जारी करते रहे निर्देश
  • सीएम ने पहले ही जताई थी प्रवासियों की वापसी के बाद केस बढ़ने की आशंका
  • गत चार रोज में बढ़ी कोरोना संक्रमितों की संख्या ने उनकी आशंका को सही ठहराया
  • मुख्यमंत्री की आशंका के बाद भी नहीं चेती अफसरशाही तो खुद उतरे मैदान में
  • मुख्यमंत्री ने कल गढ़वाल और आज कुमाऊँ का दौरा कर अफसरों के कसे पेंच

देहरादून। स्वास्थ्य विभाग की कमान अमित नेगी के हाथों में आते ही राज्य में कोरोना को हराने के लिए नई रणनीति तैयार हो गयी है। पहले ही दिन से प्रभावी हुई इस रणनीति के तहत जिस तरह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कल गढ़वाल मंडल का दौरा कर श्रीनगर और आज सोमवार को कुमाऊँ का दौरा करके हल्द्वानी में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर कड़े निर्देश दिए, उससे लगता है कि मुख्यमंत्री अब इसमें किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। अमित नेगी अपने कार्य के लिए बहुत ही सजग और ज़िम्मेदार अधिकारी माने जाते है। वह 1999 के बैच के आईएएस टॉपर रहे हैं और अभी वित्त सहित आपदा प्रबंधन और गोपन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के सचिव का कार्यभार भी संभाल रहे हैं।
गौरतलब है कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह ने पहले ही आशंका जताई थी कि उत्तराखंड में प्रवासियों के वापसी के बाद कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा और यह आंकड़ा 25 हजार तक जा सकता है। तब विपक्षियों समेत कई अफसरों ने इसे बहुत हल्के में लिया था, किंतु पिछले चार रोज में उत्तराखंड में बढ़ी कोरोना पॉजिटिव की संख्या इस बात का इशारा कर रही है कि सीएम की सोच और आशंका कितनी सही थी। लेकिन सीएम की आशंका के बाद भी सूबे की अफसरशाही नहीं चेती और स्वास्थ्य महकमे के अफसर अपने दफ्तरों में बैठकर ही निर्देश जारी करते रहे। अगर उसी समय नौकरशाही ने इसे गंभीरता से लिया होता तो आज देवभूमि में हालात दूसरे होते। इससे पहले देवभूमि में हालात ज़्यादा बिगड़े, सीएम ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव नितेश झा की जगह अमित नेगी को अहम जिम्मेदारी देते हुए कोरोना का मुकाबला करने खुद मैदान में उतर गये।
सीएम बाहर निकले तो अफसरान भी अपने दफ्तर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। सीएम त्रिवेंद्र अब तक तीन जनपदों में कोराना से लड़ाई के लिए की गई तैयारियों का मौके पर जायजा ले चुके हैं।
बीते रविवार को उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल में जाकर हालात समझे और आज सोमवार को नैनीताल के हल्द्वानी और ऊधमसिंह नगर जनपदों में मौके की नजाकत को समझा। अब सीएम खुद फील्ड में हैं तो मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के साथ अभी हाल में ही स्वास्थ्य महकमे में बतौर सचिव काम संभालने वाले आईएएस अफसर अमित नेगी भी अपने दफ्तर छोड़ दिए हैं।
अब सीएम की समीक्षा बैठकों के दौरान ही स्थानीय जरूरतों के लिहाज से नए निर्देश दिए जा रहे हैं और तमाम व्यवस्थाओं को फिर से परखा जा रहा है। अफसरों का दावा है कि राज्य में किसी भी हालात से निपटने के लिए पुख्ता इंतजामात कर लिए गए हैं।
खास बात यह है कि कोरोना महामारी के इस दौर में जिलों के प्रभारी मंत्री अभी तक सक्रिय नहीं हुए हैं। अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि किसी भी प्रभारी मंत्री ने जिले में जाकर या फिर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हालात समझने की कोशिश भी की है। इस बारे में मुख्यमंत्री पहले से ही प्रभारी मंत्रियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों के अफसरों से संपर्क में रहने का निर्देश दे चुके हैं। लेकिन प्रभारी मंत्रियों ने अपने जिले को वहां के डीएम के रहमो-करम पर ही छोड़ दिया है।
आज सोमवार को सर्किट हाउस, हल्द्वानी में वैश्विक महामारी कोविड-19 से बचाव एवं राहत कार्य के संबंध में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने साफ कहा कि अब टेस्टिंग, सैनेटाइजेशन तथा क्वारंटाइन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस संकट काल में ग्राम प्रधानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए जिला प्रशासन को उनकी हरसंभव मदद के लिए कहा गया। ताकि बाहर से आने वाले हमारे भाई-बहनों को किसी भी प्रकार की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अधिकारी इस बात का जरुर ध्यान रखे कि इन विषम हालात में कोई भी गरीब और प्रवासी भूखा -प्यासा न सोये और उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो।

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