देहरादून। विधानसभा में मनमानी नियुक्तियों को लेकर बेरोजगार युवाओं में भारी आक्रोश है। इस घोटाले में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिन पदाधिकारियों का नाम आया है, उन सभी को संघ नेतृत्व ने तलब कर लिया है। दूसरी ओर ‘पार्टी विद डिफरेंस‘ की बात करने वाली भाजपा ने इस मामले में पूर्व स्पीकर और मौजूदा काबीना मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर मौन साध रखा है। जिसका जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं जा रहा है और सरकार के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कई सियासतदां इसे ‘तूफान‘ से पहले की ‘शांति‘ बता रहे हैं।
गौरतलब है कि विधानसभा में स्पीकरों द्वारा की गईं मनमानी भर्तियों की जांच मौजूदा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी की ओर से गठित कमेटी कर रही है। इन भर्तियों में तमाम ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे आरएसएसए पदाधिकारियों के या तो नजदीकी रिश्तेदार हैं या फिर उनकी सिफारिश पर उन्हें नौकरी मिली है। संघ के शीर्ष नेतृत्व तक ये मामला पहुंचा तो वहां इसे लेकर हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि बीते सोमवार को संघ की रायपुर में हुई अखिल भारतीय समन्वय बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। जिसमें तय किया गया था कि इस बारे में एक रिपोर्ट संघ मुख्यालय को भेजी जाए और इस बाबत आज बुधवार को मेरठ में एक उच्च स्तरीय बैठक की जा रही है। इस बैठक में शामिल होने के लिए उत्तराखंड संघ के कई शीर्ष पदाधिकारी भी तलब कर लिए गए हैं।
उत्तराखंड में नियुक्तियों में मंत्रियों से लेकर संघ के पदाधिकारियों की संलिप्तता राज्य में तूफान सा आया हुआ है। इन नियुक्तियों में अपनी भूमिका स्वीकारने के बाद खासी चर्चा में आए पूर्व स्पीकर और मौजूदा काबीना मंत्री सामान्य रूप से अपना काम कर रहे हैं और भाजपा में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को छोड़कर सभी कद्दावर नेता इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पूर्व स्पीकर प्रेमचंद से जब पत्रकारों ने इस बारे में सवाल किए तो उन्होंने बेहद दबंग अंदाज में जवाब दिया था… “हां, की हैं नियुक्तियां और तीन प्रमोशन देकर सिंघल को बनाया है सचिव”। उनका यह दबंगई भरा बयान सोशल मीडिया में खासा वायरल हुआ पर भाजपा का मौन नहीं टूटा और न ऐसा लगा कि कोई एक्शन लेने की तैयारी है।
इसके बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की खबरें मीडिया में छाई रहीं। इसके बावजूद अभी तक इन घोटालों के जिम्मेदार ‘बडे़ मगरमच्छ‘ अभी तक खुला घूम रहे हैंु। जिससे कई तरह के सवाल हवाओं में तैर रहे हैं, क्योंकि बैक डोर से नौकरी पाने वालों में अधिकतर मंत्रियों के चहेते और रिश्तेदार ही हैं। हालांकि सियासत कि जानकार इसे ‘तूफान से पहले की शांति बता रहे हैं।

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