• गांव के सरकारी स्कूल से पढ़कर ही किया था मुकाम हासिल
  • कोरोना संक्रमित होने के बावजूद आखिरी दिनों तक जरूरी फाइलों की करते रहे जांच
  • अपनी माटी से था बेहद लगाव, गांव में बसने की मुराद न हो सकी पूरी

देहरादून। कोरोना वैक्सीन बनाने में अग्रणीय भूमिका निभाने वाले उत्तराखंड के सपूत की कोरोना वायरस ने ही जान ले ली। रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि ब्लॉक के बेंजी गांव निवासी चंद्र बल्लभ बेंजवाल भारत इम्यूनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीआईबीसीओएल) में सीनियर वाइस प्रेसीडेंट थे। उन्होंने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कार्यालय के आला अधिकारियों, परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को आश्वस्त किया था कि बीआईबीसीओएल देश को सस्ती वैक्सीन दे सकता है। इसका परिणाम यह हुआ कि केंद्र सरकार ने बीआईबीसीओएल को कोरोना वैक्सीन बनाने की अनुमति दी थी। बेंजवाल स्वदेशी कोवाक्सिन निर्माण प्रोजेक्ट के हेड भी थे। 18 अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसके बावजूद भी उन्होंने वैक्सीन प्रोजेक्ट से जुड़े हर पहलुओं का स्वयं निरीक्षण किया। यहां तक कि नाक में ऑक्सीजन नली लगी होने के बाद भी अपने आखिरी दिनों तक प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी लेते हुए जरूरी फाइलों की स्वयं जांच रहे थे। उनके नेतृत्व में पोलियो की दवा का निर्माण हुआ था। उनके छोटे भाई ललित बेंजवाल ने बताया कि पांच भाई-बहनों में वे सबसे बड़े थे। उन्होंने स्वामी सच्चिदानंद राजकीय इंटर कॉलेज रुदप्रयाग से 1981 में हाईस्कूल व 1983 में इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी। इसके बाद पीजी कॉलेज गोपेश्वर में उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद वर्ष 1988 में कानपुर एचबीआईटी से बीटेक में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पैतृक मकान की मरम्मत भी करा ली थी। उनको अपनी माटी से बेहद लगाव था। लेकिन, उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। उनके निधन से गांव में शोक की लहर है।

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