उत्तराखंड : पहाड़ में माताओं-बहनों के सिर से त्रिवेंद्र उतारने जा रहे घास का बोझ!

पहाड़ की ‘चिर पीड़ा’ का होगा निदान

  • मंत्रिमंडल की बैठक में घस्यारी कल्याण योजना सहित सात प्रस्तावों को मिली मंजूरी
  • प्रदेशभर में 7771 केंद्रों के माध्यम से गांवों तक पशुओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा सस्ता चारा

देहरादून। त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल की बैठक आज गुरुवार को न्यू कैंट स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय परिसर में हुई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सात प्रस्तावों पर चर्चा के उन्हें मंजूरी दी गई है। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दी। जिससे पहाड़ में माताओं और बहनों के सिर से घास का बोझ उतारने की पूरी तैयारी है।
बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। जंगली जानवरों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याणकारी योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत सस्ते गल्ले की तरह प्रदेशभर में 7771 केंद्रों के माध्यम से गांवों तक पशुओं के लिए सस्ता चारा उपलब्ध कराया जाएगा।
सहकारिता विभाग के मुताबिक इस योजना के तहत पशुचारे या साइलेज के उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। इस समय करीब आठ हजार मीट्रिक टन का उत्पादन हो रहा है। इसे बढ़ाकर 50 हजार मीट्रिक टन किया जाना है। इसके लिए प्लांट जल्द ही स्थापित किया जाएगा। पशुचारे पर प्रदेश सरकार अपनी तरफ से अनुदान भी देगी। इस समय पशु चारे पर प्रति किलोग्राम करीब 15 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सरकार की योजना है कि पहाड़ों में यह चारा करीब तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से लोगों को मिले। यह उस काम के बोझ की तुलना में काफी कम है जो महिलाओं को घास के लिए उठाना पड़ता है। 
इस अहम फैसले के अलावा कैबिनेट इन अन्य निर्णयों पर मुहर लगाई गई। जिनमें संस्कृत शिक्षा विभाग के 57 शिक्षकों को 155 शिक्षकों में समायोजित किया गया। वन भूमि पर दी गयी लीज के नवीनीकरण और नई लीज नीति को मंजूरी दी गई। उत्तराखंड पुलिस दूरसंचार अधीनस्थ सेवा नियमावली संशोधन को मंजूरी। जिसके तहत 10 साल की सेवा के बाद सब इंस्पेक्टर बन जाएंगे इस्पेक्टर। उत्तराखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन प्रोत्साहन एवं सुविधा अधिनियम 2020 की धारा 87 में संशोधन को दी मंजूरी। कोविड-19 के उपचार हेतु डेडीकेटेड 600 बेड के अस्पताल, जिनमें 50 आईसीयू बेड सम्मिलित होने के संबंध में निर्णय लिया गया। जल जीवन मिशन में दो पदों को मंजूरी, अपर परियोजना निदेशक और एसई पदों को मंज़ूरी दी गई।

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