देहरादून। गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने के बाद अब उत्तराखंड के सभी स्कूल खुल चुके है। इस बीच प्रदेश में मानसून सक्रिय हो चुका है और लगातार बारिश हो रही है। लेकिन न ही शिक्षा विभाग के अधिकारीयों को चिंता है कि प्रदेश के जो 2,785 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं उनके कारण इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की जान खतरे में है।

राज्य में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में सैकड़ों स्कूलों में भवनों के हालात बदतर हैं। प्रदेश में तकरीब ढाई हजार से ज्यादा स्कूलों में भवन जर्जर हैं। ये जर्जर भवन कभी भी भरभरा कर गिर सकते हैं। दयनीय हो चुके स्कूल के कमरों की मरम्मत को लेकर पिछले 3 महीने से शिक्षा विभाग के अधिकारी केवल कोशिश ही कर पाएं हैं। इसके बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। इन जर्जर स्कूलों में लगातार हो रही बारिश के चलते बच्चों की जान को खतरा बना हुआ है।

यह हालत तब हैं जब मानसून की पहली बरसात ने ही सारी पोल खोल कर रख दी है। छोटे शहर छोड़िए राजधानी देहरादून में ही जगह जगह जल भराव जैसी समस्या लोगों के लिए परेशानी बनती नजर आ रही है. ऐसे में इनकार नहीं किया जा सकता कि जर्जर हो चुके स्कूलों में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। खतरा एक या दो नहीं बल्कि हजारों छात्रों की जिंदगियों पर मंडरा रहा है। आलम यह है कि छोटे छोटे बच्चे पढ़ने के लिए जर्जर हालत में पड़ी बिल्डिंगों में बैठने को मजबूर हैं। कई स्कूलों की छतें टपक रही हैं तो कुछ गिरने की स्थिति में हैं।

इस पूरे मामले पर महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी का कहना है कि फिलहाल जर्जर भवनों में बच्चों को न बैठाने के लिए कहा गया है. पिछले दो-तीन महीनो में 500 ऐसे स्कूलों को आइडेंटिफाई किया है जहां मरम्मत की जानी है। वहीं, इसके अलावा बंशीधर तिवारी का कहना है कि पूरे राज्य में तकरीबन शासकीय अशासकीय मिलाकर 16,500 स्कूल हैं। इन स्कूलों को इनकी कंडीशन के हिसाब से A,B,C,D कैटेगरी में बांटा गया है। इन में से CD केटेगिरी वाले स्कूलों की मरम्मत का काम चल रहा है।

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