मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के सीएम पद संभालने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के तमाम अहम फैसलों को पलटने से भाजपा के एक गुट ने लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश की कि वे फैसले उत्तराखंड के हित में नहीं थे। हद तो यहां तक हो गयी है कि त्रिवेंद्र के पद छोड़ने के बावजूद सीएम तीरथ के कार्यकाल में हुआ सबसे चर्चित कुंभ जांच फर्जीवाड़ा भी त्रिवेंद्र की ही ‘देन’ बताकर पल्ला झाड़ा जा रहा है।
इस तर्ज पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के चार साल के कार्यकाल को एक तरह से ‘नकारते’ हुए और 100 दिनों की ‘उपलब्धियों’ को इस तरह पेश किया जैसे भाजपा की सरकार को बने ही मात्र सवा तीन माह हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां विरोधी नेता और दल के निशाने पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र न होकर तीरथ सरकार है, वहीं भाजपा की एक प्रभावशाली लॉबी अपने हर ‘पाप’ के लिये त्रिवेंद्र को जिम्मेदार बताने के प्रचार अभियान में जुटी है। इसक एक जीता जागता उदाहरण कुंभ में कोविड -19 के जानलेवा टेस्टिंग फर्जीवाड़ा है। जिसकी वजह से पूरी भाजपा बचाव की मुद्रा में आ गयी है, लेकिन इस फर्जीवाड़े की असलियत पर पर्दा डालते हुए इसकी पूरी जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सिर पर डाली जा रही है।
एक सोची समझी साजिश के तहत भाजपा राज में कुंभ सहित जो घोटाले हुए हैं उनको त्रिवेंद्र के मत्थे मढ़े जाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जबकि  इस फर्जीवाड़े में ‘गंगा’ नहाने वाले एक भी आला अफसर को अभी तक जवाब तलब करने के सरकार की ओर से आदेश तक जारी नहीं किये गये हैं। पूरी भाजपा को सांप सूंघ गया है, इसके बावजूद लोगों का सच्चाई से ध्यान भटकाने के लिये कई सांसद, विधायक, मंत्री और बयानबहादुर पार्टी नेता ऐसा व्यवहार कर रहे हैं कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है और जो कुछ हुआ भी या जो कुछ आगे होगा, उसके लिए त्रिवेंद्र जिम्मेदार थे, हैं और रहेंगे।
अब अपनी नाक बचाने के लिये ताजी साजिश की पटकथा देखिये…
तीरथ सिंह रावत 10 मार्च को मुख्यमंत्री बन गए थे। इसके दो दिन बाद मैक्स कंपनी को टेस्टिंग का ठेका देने की फाइल 12 मार्च को कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिकारी ने आगे बढ़ाया, लेकिन जब फर्जी आईडी से फर्जी टेस्टिंग तथा मैक्स कंपनी के संचालक शरद पंत का भाजपा से ‘रिश्ता’ उजागर होने लगा तो मैक्स के 12 मार्च के आवेदन पत्र को हेरफेर कर 12 जनवरी का दिखाने का ढिंढोरा पीटा गया। इस फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड शरद पंत खुद को फंसते देख अपने हाई राजनीतिक संबंधों के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरिद्वार के सांसद एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के साथ फोटो सोशल मीडिया पर जारी कर दिये ताकि उसकी ‘पहुंच’ का जांच अधिकारियों और अन्य लोगों को पता चल सके।
उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि 3800 टेस्टिंग रिपोर्ट नेपाली फार्म के एक पते की हैं। 28 हजार की आईडी से 73 हजार जांच रिपोर्ट  दिखाई गई है। मैक्स, नलवा, डालफिया तथा डॉ. लालचंदानी ने रेपिड एंटीजन टेस्टिंग ही अधिक की है। मैक्स, नलवा व डॉ. लालचंदानी ने कुंभ में 57 प्रतिशत टेस्टिंग की है। कुल एक लाख 18 हजार 239 सेंपलों की टेस्टिंग में केवल 39 केस ही पॉजिटिव है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस सीएमओ ने जो मुकदमा दर्ज कराया, प्रथमदृष्टया उसी कुंभ मेला सीएमओ के विरुद्ध कार्रवाई हो जानी चाहिए थी क्योंकि उन्होंने आईसीएमआर से एप्रुवल न होने के बाद भी मैक्स कंपनी को ठेका क्यों दिया, लेकिन मेला सीएमओ पर कोई हाथ डालने की हिम्मत नहीं दिखा रहा है कि कहीं वह पोल न खोल दे, किसके दबाव में उनको 12 मार्च की डेट को हेरफेर कर 12 जनवरी किया है।
अब इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ यह आ गया है कि देहरादून निवासी एक पत्रकार सुभाष शर्मा ने बकायदा प्रेसवार्ता कर इस फर्जीवाड़े के मामले में कई सवाल खड़े किए हैं। साथ ही इस बाबत सीडीओ को कुछ अहम दस्तावेज भी सौंपे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सुभाष ने पत्रकारवार्ता में बताया कि महाकुंभ 2021 में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं की कोरोना जांच के लिए मैक्स कॉरपोरेट सर्विस और मेला प्रशासन के बीच 12 मार्च 2021 को टेंडर हुआ था। टेंडर के कागजात में ओवर राइटिंग करते हुए 12 मार्च के स्थान पर 12 जनवरी कर दिया गया। इसमें मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हैं। इससे संबंधित दस्तावेज सीडीओ को दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जिस कंपनी को टेंडर मिला, उसने आगे अन्य दो लैब को कोरोना जांच का काम दे दिया। एक लैब ऐसी है जिसके पास कोरोना जांच करने का कोई लाइसेंस भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी को जांच का टेंडर दिया गया उसके संचालक के बड़े नेताओं व मंत्रियों के साथ सोशल मीडिया में फोटो अपलोड हैं। इस मामले में उन नेताओं ने भी चुप्पी साध रखी है। आरोप लगाया कि सचिवालय में तैनात अधिकारी की भी इस मामले में अहम भूमिका है, उनकी भी जांच की जाए। इसके बाद भाजपा खेमे में हड़कंप मचा हुआ है और कई बयान बहादुर अपनी नाक बचाने के लिये मुंह छिपाते हुए फिर रहे हैं।

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