चमोली और बागेश्वर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याएं एक जैसी : बसंती

  • बागेश्वर की जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा, इनके विकास के लिए दोनों ही जिलों के जनप्रतिनिधियों को करने होंगे सामूहिक प्रयास

थराली से हरेंद्र बिष्ट।
आज सोमवार को यहां बागेश्वर की जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आज भी बागेश्वर और चमोली जिले की सीमा पर ऊंचाई पर बसे तमाम गांव विकास की दृष्टि से काफी पिछड़े हुए हैं। जिनके विकास के लिए दोनों ही जिलों के जनप्रतिनिधियों को सामूहिक प्रयास करने होंगे तभी इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा सकता हैं।
एक विवाह समारोह में ग्वालदम से होते हुए देवाल पहुंची बागेश्वर की जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देवी का यहां स्वागत हुआ। देवाल के ब्लाक प्रमुख दर्शन दानू, प्रधान संघ अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट, पूर्व जिपंस किशन दानू, रामपुर के पूर्व प्रधान हरेंद्र सिंह गड़िया, चोटिंग के पूर्व क्षेपंस रमेश गड़िया, मनोज कुमार आदि पंचायत प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत करते हुए  बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लाक एवं इससे लगे देवाल ब्लाक के सीमावर्ती गांवों की समस्याओं से अध्यक्ष को रूबरू कराया।

इस पर बसंती देवी ने कहा कि दोनों ही जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याएं एक जैसी हैं। जिनकी उन्हें जानकारी हैं। इन सीमावर्ती गांव की समस्याएं तब तक हल नहीं हो सकती हैं जब तक दोनों जिलों के जनप्रतिनिधि आपस में मिल बैठ कर योजनाओं का चयन कर सरकारों तक नहीं पहुचाते हैं। इस मौके पर देवाल के ब्लाक प्रमुख दर्शन दानू सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने वर्षों से सुयालकोट-खेता-मानमती-चोटिंग-हरमल-झलियां मोटर सड़क का निर्माण बागेश्वर के कुंवारी होते हुए बदियाकोट तक करवाने के प्रयास किए जाने, प्रत्येक 12 वर्षों में आयोजित होने वाली नंदा राजजात यात्रा में सम्मिलित होने वाली बदियाकोट की भगवती का यात्रा रूट बदियाकोट, कुंवारी, हरमल, उदेपुर, चोटिंग होते हुए देवाल किए जाने और पिंडारी ट्रैक रूट को देवाल से भी शुरू किए जाने का प्रस्ताव पारित करवा कर सरकार को भेजे जाने की मांग की। जिस पर अध्यक्ष ने सहमति जताते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

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