पॉलिश किया हुआ गेहूं बेचते थे आरोपी, सुप्रीम कोर्ट ने वकील से कहा- आप खाकर दिखाइये और जमानत ले जाइये

फाइल फोटो

नई दिल्ली। खाद्य पदार्थ में मिलावट के एक मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आपकी अर्जी पर हम विचार करने के लिए तैयार हो जाएंगे अगर आप या आपकी फैमिली उस खाद्य सामग्री को खाने के लिए तैयार हैं जो आपका क्लाइंट बेचता है।
याचिकाकर्ता के वकील इस पर चुप से हो गए और फिर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अग्रिम जमानत की अर्जी पर विचार के लिए तैयार नहीं हैं। तब याचिकाकर्ता ने कहा कि वह अर्जी वापस लेना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याची के वकील से कहा कि क्या आप और आपकी फैमिली ये सामग्री खाने को तैयार है। अगर हां तो हम जमानत के लिए तैयार हैं। अदालत ने कहा कि आपको जवाब देने में दिक्कत क्यों हो रही है। लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाए? हम आपकी अर्जी पर क्यों विचार करें।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगुवाई वाली बेंच के सामने मध्यप्रदेश के नीमच जिले के दो याचिकाकर्ता प्रवर गोयल और विनीत गोयल की ओर से ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की गई थी। दोनों व्यापारियों पर आरोप है कि वे पॉलिश वाले गेहूं बेचते थे। इस काम में किया जाने वाला रंग रोगन खाने वाला नहीं था। दिसंबर में हुई रेड में सैकड़ों किलो पॉलिश किया हुआ गेहूं बरामद किया गया था। दोनों पर मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य के मामले में सिर्फ भारत में लिबरल रवैया है।

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