कुली बेगार आंदोलन के सौ साल पूरे

  • जागरूकता रैली में छोलियां नृत्य से समां बांधा

बागेश्वर। उत्तराखंड का प्रमुख कौतिक उत्तरायणी पर्व के शुभारंभ हो गया है। साथ ही कुली बेगार आंदोलन के सौ साल पूरे होने पर नगर में जागरूकता रैली निकाली गई। विधायक चंदन राम दास, जिलाधिकारी विनीत कुमार, पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा और नगरपालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने रैली को हरी झंडी दिखाई। रैली के बाद सरयू तट पर आयोजित गोष्ठी में कुली बेगार आंदोलन के नेतृत्वकर्ता कुमाऊं केसरी पंडित बद्री दत्त पांडे के पौत्र सेवानिवृत्त कर्नल रवींद्र पांडे ने भी प्रतिभाग किया।
जागरूकता रैली को रवाना करते हुए विधायक दास ने कहा कि उत्तरायणी जिले का प्रमुख मेला है। इसका धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक और राजनीतिक महत्व है। हर साल होने वाले मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान और बागनाथ मंदिर में पूजा करने को उमड़ते हैं। उन्होंने लोगों से कोरोना को लेकर जारी सरकार की गाइड लाइन का पालन करने की अपील की। जिलाधिकारी विनीत कुमार ने कहा कि अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। इसके चलते उत्तरायणी मेला भी भव्य रूप से नहीं कराया जा रहा है। नगरपालिका अध्यक्ष खेतवाल ने कहा कि कोरोना ने इस साल मेले को भव्य स्वरूप को छीना है। इसके चलते मेला केवल धार्मिक स्वरूप में कराया जा रहा है। रैली में पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, जिला पंचायत उपाध्यक्ष नवीन परिहार, ब्लॉक प्रमुख पुष्पा देवी, व्यापार मंडल अध्यक्ष हरीश सोनी, बार एसोसिएशन अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी, दलीप सिंह खेतवाल, इंद्र सिंह परिहार, सीडीओ डीडी पंत, एसडीएम योगेंद्र सिंह, संजय साह जगाती आदि मौजूद रहे। कुली बेगार आंदोलन के सौ साल पूरे होने पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने आंदोलन में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। कुमाऊं केसरी पंडित बद्री दत्त पांडे के पौत्र सेवानिवृत्त कर्नल रवींद्र पांडे ने कहा कि समय का पाबंद, सत्य के लिए लड़ना और अनुशासित जीवन उनके दादा के जीवन का अहम हिस्सा रहा। वह दूसरों को भी अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करते थे। पंडित गोविंद बल्लभ पंत की बहु डॉ. वसुधा पंत ने भी गोष्ठी में अपने विचार रखे।

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