राफेल के लीक दस्तावेज वैध!

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को झटका

  • राफेल डील पर फैसले की समीक्षा के दौरान नए दस्तावेज पर भी विचार करेगी अदालत
  • कोर्ट ने केंद्र की उस दलील को खारिज किया कि दस्तावेज चोरी के, उन पर न हो विचार
  • केद्र सरकार ने लीक हुए दस्तावेज को बताया था ‘विशेषाधिकार वाले गोपनीय’ दस्तावेज

केंद्र सरकार की दलील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर नए दस्तावेज के आधार पर सुनवाई का फैसला किया है। तीनों न्यायधीशों ने एक मत से दिए फैसले में कहा कि जो नए दस्तावेज डोमेन में आए हैं, उनके आधार पर मामले में रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई होगी। जिसके लिये सुप्रीम कोर्ट नई तारीख तय करेगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लीक दस्तावेज के आधार पर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई का विरोध किया था और कहा था कि ये दस्तावेज प्रिविलेज्ड (विशेषाधिकार वाला गोपनीय) दस्तावेज हैै। इसलिये रिव्यू पिटिशन खारिज किया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि आरटीआई एक्ट 2005 में आया है और ये एक क्रांतिकारी कदम था। ऐसे में हम पीछे नहीं जा सकते।
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि जो दस्तावेज प्रशांत भूषण ने रिव्यू पिटिशन के साथ पेश किए हैं, वे प्रिविलेज्ड दस्तावेज है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ये दस्तावेज गोपनीय है और आरटीआई के दायरे में न होने के साथ ही गोपनीय दस्तावेज है। जो दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो और दो देशों के संंबंधों पर असर डालता हो उन्हें गोपनीय दस्तावेज माना गया है। आरटीआई के तहत भी देश की संप्रभुता से जुड़े मामले को अपवाद माना गया है। सरकारी गोपनीयता कानून में भी रोक है।
इस दौरान याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ये तमाम दस्तावेज पब्लिक डोमेन में है। जो दस्तावेज पहले से लोगों के सामने है उस पर कोर्ट विचार न करें क्योंकि ये प्रिविलेज्ड दस्तावेज है, यह बेकार की दलील है। एविडेंस एक्ट के तहत जो दस्तावेज पब्लिक डोमेन में लाने से रोका गया है, वे वैसे दस्तावेज हैं जो पहले से गोपनीय हैं और प्रकाशित नहीं हुए हैं, लेकिन इस मामले में डिफेंस के दस्तोवज पहले से लोगों के सामने है। केंद्र सरकार ने अभी तक मामले में केस दर्ज नहीं किया। पहली बार 18 नवंबर को ये रिपोर्ट वेबसाइट पर छपी।
उन्होंने बताया कि सीएजी रिपोर्ट को सरकार ने पेश किया है। उसमें डिफेंस डील से संबंधित जानकारी है। भूषण की दलील थी कि सरकार ने खुद सीएजी रिपोर्ट को कोर्ट में पेश किया। ऐसे में उनकी ओर से पेश दस्तावेज को प्रिविलेज्ड दस्तावेज कैसे कह सकते हैं। उधर प्रेस काउंसिल कहता है कि मीडिया कर्मी सोर्स बताने के लिए बाध्य नहीं है। एसपी गुप्ता से संबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे रखी है कि कोई दस्तावेज गोपनीय है या नहीं और देश की सुरक्षा से जुड़ा है, इस बात को पब्लिक इंट्रेस्ट में परखा जाएगा।
प्रशांत ने कहा कि इस मामले में दस्तावेज पहले से पब्लिक में है। सरकार खुद की अपने लोगों को इस तरह की जानकारी लीक करती रही है। रक्षा मंत्री की फाइल नोटिंग भी इसी तरह लीक की गई। टू जी मामले और कोल ब्लॉक मामले में भी दस्तावेज पब्लिक डोमेन में आए थे और सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विसल ब्लोअर का नाम बाहर लाने की जरूरत नहीं है। अगर दस्तावेज केस के लिए जरूरी है तो यह बात औचित्यहीन है कि उसे कहां से और कैसे लाया गया है।
भूषण ने कहा कि वियतनाम वार से संबंधित पेंंटागन के दस्तावेज पब्लिक डोमेन में आए या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था और यूएस सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण दस्तावेज गोपनीय रखने की दलील खारिज कर दी गई थी। सरकार की दलील पूर्वाग्रह से ग्रस्त है क्योंकि यहां दस्तावेज को विशेषाधिकार वाले दायरे में नहीं रखा जा सकता क्योंकि ये पहले ही प्रकाशित है। अगर दस्तावेज करप्शन के केस के लिए औचित्यपूर्ण है तो इस बात का मतलब नहीं रह जाता कि ये कहां से लाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में जांच से संबंधित अर्जी 14 दिसंबर 2018 को खारिज कर दी थी। जिसके बाद रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है जिस पर ओपन कोर्ट में सुनवाई हुई थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने मामले की सुनवाई हुई थी।

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