गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को 63 की उम्र में निधन हो गया। वह पैन्क्रियाटिक कैंसर से लंबे समय से पीड़ित थे। उन्होंने भारत के साथ ही अमरीका में भी इसका इलाज कराया था। पैन्क्रियाटिक कैंसर ज्यादा जानलेवा इसलिए होता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से पता नहीं चलते हैं। एडवांस स्टेज पर पैन्क्रियाटिक कैंसर का इलाज शुरू भी हो जाए तो मरीज के बचने के चांस कम होते हैं।
यह बीमारी इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामने नहीं आते हैं। इसके लक्षण तब दिखाई देना शुरू होते हैं जब या तो प्रभावित सेल्स बड़ा आकार ले लेते हैं या फिर पैंक्रियाज के बाहर फैल चुके होते हैं। यह स्थिति तब होती है जब पैंक्रियाज के सेल काउंट में बहुत तेजी से वृद्धि होने लगती है। अनियंत्रित कोशिकाएं ट्यूमर बनाती हैं जो खून के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है, जिससे शरीर के अन्य अंग काम करना बंद कर देते हैुं और मरीज की मौत हो सकती है।
पैंक्रियाज में ग्रंथियां मौजूद होती हैं जो शरीर के लिए पैन्क्रियाटिक जूस, हार्मोन और इंसुलिन बनाती हैं। कैंसर पैंक्रियाज के एक्सोक्राइन और एंडोक्राइन हिस्से में पनपता है। एक्सोक्राइन कैंसर पैन्क्रियाटिक ग्लैंड के अंदर होता है वहीं एंडोक्राइन ट्यूमर उस हिस्से में होता है जो शरीर के लिए हार्मोन बनाता है।
पैन्क्रियाटिक कैंसर के जो शुरुआती लक्षण दिखते भी हैं वे अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। ऐसे में मरीज उन अन्य बीमारियों का ही इलाज करवाने लगता है, जिससे पैन्क्रियाटिक कैंसर को बढ़ने का मौका मिल जाता है।
पैन्क्रियाटिक कैंसर के लक्षण
निम्नलिखित लक्षण यदि शरीर में अचानक से दिखाई दें और लंबे समय तक रहें तो व्यक्ति को एक बार पैन्क्रियाटिक कैंसर के लिए टेस्ट जरूर करवाना चाहिए –
1. पेट और पीठ में दर्द बने रहना।
2. अचानक वजन में कमी आ जाना।
3. पाचन संबंधी समस्या।
4. बार-बार बुखार आना।
5. भूख न लगना।
6. त्वचा का रूखापन बढ़ना।
7. बेचैनी बने रहना या उल्टी होना।
8. पीलिया।
9. पेल या ग्रे मल।
10. हाई ब्लड शुगर
पैन्क्रियाटिक कैंसर होने की सटीक वजह का अब तक पता नहीं लगाया जा सका है। हालांकि इस प्रकार के कैंसर के लिये स्मोकिंग, जेनेटिक्स, मोटापा, ज्यादा देर बैठे रहने की आदत, डायबिटीज आदि माने जाते हैं।

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