नैनीताल। उत्तराखंड रोडवेज के कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान पांच माह का वेतन न दिए जाने पर हाईकोर्ट ने तीरथ सरकार को फटकार लगाई। साथ ही कोर्ट ने सुबूतों के साथ 25 जून को यह बताने के लिए कहा कि निगम की मदद के लिए सीएम रिलीफ फंड से 20 करोड़ और हिल लॉस के लिए 20 करोड़ रुपये निगम की मदद के लिए देने के जो आदेश कोर्ट ने पूर्व में दिए थे, उनका पालन हुआ या नहीं।
हाईकोर्ट ने निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष चौहान को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष रोडवेज कर्मचारी यूनियन की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जब निगम से पूछा कि अब तक निगम कर्मियों को लॉकडाउन के दौरान का वेतन क्यों नहीं दिया गया तो निगम ने कोर्ट को उसके पास बजट न होने की बात कही। इस पर कोर्ट ने पूर्व के आदेश का संज्ञान लेते हुए सरकार से पूछा कि अदालत ने 20 करोड़ रुपये सीएम रिलीफ फंड से देने के जो आदेश दिए थे, उसका पालन हुआ या नहीं। तीरथ सरकार की ओर से बताया गया कि यह राशि निगम को दे दी गई है। कोर्ट ने जब सरकार से प्रमाण पेश करने के लिए कहा तो वह मौन रही। सरकार के मौन रहने पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और सरकार को 25 जून को सबूतों के साथ शपथपत्र पेश करने के लिए कहा। कोर्ट ने सरकार से यह भी बताने के लिए कहा कि देहरादून में हरिद्वार रोड पर निगम की जो 250 करोड़ रुपये की संपति है, उसका क्या हुआ।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि निगम ने कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान का वेतन नहीं दिया है और न ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान किया जा रहा है। सरकार परिसंपत्तियों के बंटवारे के मामले में भी उदासीन है, जबकि यूपी परिवहन निगम के पास करोड़ों रूपये बकाया हैं।

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