लद्दाख के बुजुर्ग बोले- 1962 जैसे हो रहे हालात!

खतरे की आहट

  • चीन से लगे पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग चीन के भारी सैन्य मूवमेंट से चिंतित बुजुर्गों का दावा, 1962 के बाद पहली बार चीन ने  इतने बड़े पैमाने पर यहां सैन्य साजो सामान जुटाया
  • सोमवार रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष में भारत के कर्नल सहित तीन जवान शहीद
  • अब चीन ने दी धमकी, कहा- अब भारत एकतरफा कार्रवाई न करे, नहीं तो मुश्किलें बढ़ेंगी
  • चीन के भी चार जवान मारे जाने की खबर, चीनी सैनिकों को स्ट्रैचर पर लेकर जाता देखा गया
  • बॉर्डर पर चीन की ओर से पहले किया गया पत्थर और डंडों से हमला, कोई गोली नहीं चली

लद्दाख/दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद अब विस्फोटक होता जा रहा है। बीते सोमवार रात लद्दाख की गालवन वैली में दोनों देशों के सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष में भारत के एक कर्नल और दो जवान शहीद हो गए। आज मंगलवार को भारत की तरफ से कहा गया है कि चीन को भी नुकसान हुआ है। उनके चार सैनिक मारे जाने की खबर है।  उधर चीन से लगे पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग चीन के भारी सैन्य मूवमेंट से चिंतित हैं। स्थानीय बुजुर्गों का दावा है कि 1962 के बाद पहली बार चीन ने इतने बड़े पैमाने पर यहां सैन्य साजो सामान जुटाया है।
लद्दाख बॉर्डर पर भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प में दोनों तरफ नुकसान की खबरे हैं। भारतीय सेना के तीन जवानों की शहादत की खबर के साथ यह कहा जा रहा है कि चीन के जवान भी मारे गए हैं। खबरों के मुताबिक, इस झड़प में चीन ने अपने चार सैनिक खोए हैं। जिन्हें स्ट्रेचर पर लेकर जाते देखा गया।

फिलहाल भारतीय सेना की ओर से कहा गया है कि नुकसान दोनों तरफ हुआ है। बॉर्डर पर चीनी सैनिकों ने गोली तो नहीं चलाई लेकिन लाठी-डंडों, पत्थर से हमला किया था। लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ ‘हिंसक टकराव’ के दौरान भारतीय सेना का एक अधिकारी और तीन जवान शहीद हो गए। भारत और चीन की सेना के वरिष्ठ अधिकारी लद्दाख में तनाव कम करने के लिये बैठक कर रहे हैं। बीते पांच हफ्तों से गलवान घाटी में बड़ी संख्या में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने खड़े थे। यह घटना भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के उस बयान के कुछ दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं। भारत-चीन सीमा पर 45 साल यानी 1975 के बाद ऐसे हालात बने हैं, जब भारत के जवानों की शहादत हुई है। इस बार कोई गोली नहीं चली। सैनिकों के बीच पथराव हुआ। डंडों से एक दूसरे पर हमला किया गया। भारतीय जवानों की जवाबी कार्रवाई में चीन की तरफ से भी चार सैनिक मारे गए हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत एकतरफा कार्रवाई न करे, नहीं तो मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं चीन के अखबार द ग्लोबल टाइम्स ने चीन के विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच रजामंदी बनी थी, लेकिन भारतीय जवानों ने इसे तोड़ दिया और बॉर्डर क्रॉस की। इसके बाद जवानों ने चीन के सैनिकों पर हमला किया। इसी वजह से हिंसक झड़प हुई। हालांकि भारत सरकार ने कहा है कि भारतीय सैनिकों ने सीमा पार नहीं की थी, बल्कि चीनी सैनिक ही भारतीय सीमा में घुस आये थे।
आज मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, तीनों सेनाओं के चीफ और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मीटिंग की। दोनों देशों के बीच 41 दिन से सीमा पर तनाव है। इसकी शुरुआत 5 मई से हुई थी। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच जून में ही चार बार बातचीत हो चुकी है। बातचीत में दोनों देशों की सेनाओं के बीच रजामंदी बनी थी कि बॉर्डर पर तनाव कम किया जाए या डी-एक्सकेलेशन किया जाए। डी-एक्सकेलेशन के तहत दोनों देशों की सेनाएं विवाद वाले इलाकों से पीछे हट रही थीं।
पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विनोद भाटिया बताते हैं कि दोनों ओर के सैनिकों के बीच ये हिंसक झड़प और उसमें एक कर्नल और दो जवानों की शहादत बेहद चिंता की बात है। दोनों ही पक्षों को आपस में मिल-बैठकर हालात को तुरंत काबू में लाना होगा। यह हिंसक झड़प बताती है कि हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। इसे हल्के में न लिया जाए।
1962 की जंग के बाद 11 सितंबर 1967 को सिक्किम के नाथू-ला में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद 15 सितंबर 1967 को भी झड़प हुई। विवाद अक्टूबर 1967 में जाकर थमा था। चीन ने तब दावा किया था कि भारत के 65 सैनिक शहीद हुए थे। वहीं, चो ला झड़प में भारत के 36 जवान शहीद हुए थे। अनुमान है कि पूरे टकराव के दौरान 400 चीनी सैनिकों की भी मौत हुई थी।
पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील पर 5 मई को फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। दोनों तरफ के अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ था।
पिछले माह झड़प कहां, कब और कैसे?
1. तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील : उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।
2. तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम: यहां 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर में भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी।
3. तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख : जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

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