सोमवार को हुए संघर्ष में भारत के 23 जवान शहीद, चीन के 43 सैनिक मौत के घाट उतारे

फ़ाइल फोटो

एलएसी पर विस्फोटक हालात

  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में पिछले एक महीने से जारी है तनाव
  • साजिश के तहत चीन के सैनिकों ने छिपकर पत्थरों, डंडों से किया हमला
  • रिपोर्ट के मुताबिक इस संघर्ष में चीन का कमांडिंग अफसर भी मारा गया
  • अभी जीवन और मौत से जंग लड़ रहे हैं करीब दो दर्जन भारतीय जवान  
  • 110 भारतीय सैनिकों को इलाज की जरूरत, बढ़ सकती है शहीदों की संख्या
  • धोखेबाज चीन की इस हरकत के बाद भारत में शीर्ष स्तर पर बैठक जारी
  •  लद्दाख में झड़प के बाद चीन ने भारत को सीमा पार न करने की दी चेतावनी

नई दिल्ली। सोमवार रात धोखेबाज चीन ने निहत्थे भारतीय सैनिकों पर गलवान घाटी में पूरी योजना के साथ हमला किया था। लोहे के रॉड और नुकीले डंडों से लैस चीन के सैनिकों ने 16 बिहार रेजीमेंट के जवानों  पर प्रहार किया, जिसमें कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू समेत 23 जवान शहीद हो गए। इस संघर्ष में चीन के 43 सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है। सूत्रों ने बताया कि करीब दो दर्जन सैनिक अभी जीवन और मौत से जंग लड़ रहे हैं और करीब 110 को इलाज की जरूरत है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सैन्य अफसर ने बताया कि शहीदों की संख्या बढ़ सकती है।
 अंग्रेजी वेबसाइट न्यूज 18 ने लेह अस्पताल में भर्ती घायल जवानों की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी से हवाले से लिखा है कि चीनी सैनिकों ने पहाड़ों की ओट लिए निहत्थे सैनिकों को ढूंढा और उन पर हमले किए। चीन के अचानक हुए हमले से हैरान भारतीय जवानों ने उनका डटकर मुकाबला किया। गुत्थमगुत्था हुए कुछ जवान पहाड़ की ओट तक जा पहुंचे, जिससे वे नीचे गिर गए। उनके साथ चीन जवान भी नीचे गिए।
कर्नल संतोष बाबू ने चीनी सेना को पेट्रोल पॉइंट 14 के करीब बनाए गए अस्थायी टेंट को हटाने को कहा था। चुशूल में दोनों देशों के जनरलों के बीच हुई बैठक में इस इलाके को खाली करने पर सहमति बनी थी। लेकिन बावजूद इसके चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा के भीतर पेट्रोल पॉइंट 14 के करीब एक अस्थायी टेंट बना लिया। सैनिकों को इस टेंट को हटाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन चीनी सेना ने इस टेंट को खाली करने से मना कर दिया और रविवार को पथराव की घटना हुई। चीन की सेना भारत को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने लगी। फिर सोमवार रात दोनों देशों के सेनाओं के बीच खूनी संघर्ष हुआ।
सूत्रों ने बताया कि ऊंचाई पर पॉइंट 14 पर मौजूद चीनी सैनिकों ने बड़े-बड़े पत्थरों को भारतीय पोजीशन की तरफ फेंका। कई भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों का बहादुरी से सामना किया। हालांकि कई के पास अपनी सुरक्षा के लिए मौके नहीं थे। भारतीय सैन्य अधिकारियों ने बताया कि चीनी सैनिकों ने बड़ी संख्या में भारतीय जवानों के शव सोमवार सुबह सौंपे। इस खूनी संघर्ष में कितने चीनी सैनिक मारे गए हैं इस बारे में पेइचिंग कुछ नहीं बताया है, लेकिन भारतीय सेना ने दावा किया है कि उन्होंने चीनी सेना की बातचीत सुनी है और चीन के 43 सैनिक मारे गए हो सकते हैं
गौरतलब है कि चीन लंबे वक्त से एलएस पर खुद को मजबूत करने में लगा है। उसने खुद वहां 6 हजार के करीब सैनिक, आर्टिलरी गन, टैंक आदि तैनात किए, लेकिन भारत ने जब गलवान में सड़क निर्माण किया तो उसे मिर्ची लग गई। उसके सैनिकों ने भारतीय जवानों को एक सीमा से आगे जाने से रोका भी। इसके बाद से ही स्थिति बिगड़ी।
झड़प के बाद मंगलवार सुबह चीन की तरफ से मीटिंग करने की अपील की गई ताकि तनाव कम किया जा सके और हालात पर काबू पाया जा सके। दोनों देशों के मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों ने बातचीत की। दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, आर्मी चीफ, नेवी चीफ, एयर फोर्स चीफ के साथ बातचीत की। मीटिंग में विदेश मंत्री भी मौजूद थे। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सारे काम एलएसी में अपनी सीमा के अंदर ही करता है। चीन से भी ऐसी उम्मीद रखते हैं। हमें उम्मीद थी कि सब कुछ अच्छे से होगा। लेकिन चीन द्वारा स्थिति बदलने की एकतरफा कोशिश करने पर हिंसक झड़प हो गई। इसमें दोनों पक्षों के लोगों की मौत हुई है, इससे बचा जा सकता था। विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत जारी है।
उधर पूर्वी लद्दाख में झड़प के बाद चीन ने भारत को सीमा पार नहीं करने की चेतावनी दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने सोमवार को दो बार एलएसी पार की। चीनी सैनिकों को भड़काते हुए उन पर हमला किया, जिसके बाद दोनों सेनाओं के बीच गंभीर टकराव हुआ। चीन ने तीन भारतीय सैनिकों के मारे जाने का जिक्र किया, लेकिन अपने नुकसान पर कुछ नहीं कहा। बाद में चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने स्वीकार किया कि चीन के पांच सैनिक मारे गए हैं। अखबार के संपादक ने ट्वीट किया कि चीनी पक्ष को भी जान का नुकसान पहुंचा है।

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