सब गोलमाल है

  • कुंभ के दौरान एक लाख एंटीजन जांच संदेह के घेरे में, 90 प्रतिशत सैंपल कलेक्शन की एंट्री राजस्थान की
  • हरिद्वार कुंभ में जो लोग आए ही नहीं, उनके मोबाइल नंबर पर स्वास्थ्य विभाग ने भेजी कोविड जांच रिपोर्ट

देहरादून। हरिद्वार कुंभ में जो लोग आए ही नहीं, उनके मोबाइल नंबर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविड जांच की रिपोर्ट पहुंच गई। मामले में एक फर्म की करीब एक लाख जांचें संदेह के घेरे में हैं। सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी के निर्देशों के बाद हरिद्वार के जिलाधिकारी ने जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, सरकार ने जिन नौ फर्मों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी इनमें से कई फर्मों ने आरटी पीसीआर जांच की तो कई ने एंटीजन जांच की।
फरीदकोट पंजाब के एक युवक के मोबाइल पर कोविड नेगेटिव रिपोर्ट का मैसेज पहुंचने से कुंभ में जांच घोटाले की परतें खुलने लगी। वह युवक कुंभ में आया ही नहीं था और अधिकृत लैब ने उसकी फर्जी रिपोर्ट बनाकर भेज दी। उसकी शिकायत के बाद जब कोविड कंट्रोल रूम की टीम ने जांच की तो एक फर्म की करीब एक लाख जांचें संदेह के घेरे में आ गई। इनमें तमाम जांचें तो ऐसी थीं, जिनमें एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था। एक ही पते पर 500 जांचें कराई गई। यहां सवाल उठता है कि जिन काबिल अफसरों को इन जांच रिपोर्टों की ‘जांच’ करनी थी, वे उस समय क्या कर रहे थे जब वे ऐसी लैब को ‘एनओसी’ दे रहे थे। इससे साफ जाहिर है कि कुछ अफसरों को बचाने के लिये इसका ठीकरा केवल जांच करने वाली लैब के सिर पर ही फोड़ा जा रहा है।  
जांच टीम ने पिछले सप्ताह शासन को इस गड़बड़ी से अवगत कराया तो सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने इसकी जांच हरिद्वार जिलाधिकारी को सौंपते हुए 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। डीएम इस मामले की जांच कर रहे हैं। विभागीय जांच में पाया गया कि फर्म ने लगभग एक लाख सैंपलों की जांच की है। जिसमें पॉजिटिव दर कम और निगेटिव की ज्यादा है। एक ही सैंपल आईडी और मोबाइल नंबर से कई लोगों को जांच रिपोर्ट जारी की गई। साथ ही 90 प्रतिशत सैंपल कलेक्शन की एंट्री राजस्थान की है। जबकि हर व्यक्ति के सैंपल की आईडी अलग होती है। सैंपल जांच रिपोर्ट में दर्ज पते भी संदेह है। एक ही जगह से मकान नंबर क्रमवार लिखे गए हैं। 
इस मामले में कैबिनेट मंत्री एवं शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया, ‘मैंने स्वयं ऐसे मामले पकड़े हैं। देहरादून में भी ऐसा एक प्रकरण सामने आया था। इसलिए स्वास्थ्य महानिदेशक के स्तर से सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी हो गए हैं कि वे जितनी भी आरटी पीसीआर और रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए मान्य की गई लैब हैं, उनकी जांच कराएं।’ 
इस बाबत स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा ने बताया कि हरिद्वार में जो शिकायत मिली थी, उसके आधार पर राज्य कोविड कंट्रोल रूम ने प्राथमिक जांच की है। इसमें कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। जिनके आधार पर शासन ने डीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। डीएम से अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। कुंभ में नौ फर्मों को एंटीजन और आरटी पीसीआर जांच के लिए अधिकृत किया गया था। यह गड़बड़ी रैपिड एंटीजन टेस्टिंग में आई है। इसके अलावा, एक शिकायत ऊधमसिंह नगर में भी मिली थी, उसकी भी जांच चल रही है। 
जबकि सीएमओ हरिद्वार डॉ. एसके झा ने ‘प्रोफेशनल’ जवाब देते हुए कहा, अभी टिप्पणी करना ठीक नहीं है, इसकी जांच की जा रही है। अगर कुछ गलत हुआ है तो जांच में खुलासा होगा। स्वास्थ्य अधिकारी हरिद्वार अरुण सिंह सेंगर ने कहा कि गलत डाटा दर्ज होने का संज्ञान लिया गया है। इसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद तथ्य सामने आएंगे और गलत डाटा डाला गया होगा तो कार्रवाई होगी। सवाल यहां भी अपनी जगह है कि जांच के दौरान जनाब क्या कर रहे थे। 
प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस प्रीतम सिंह का कहना है कि जब कुंभ प्रारंभ हुआ, राज्य सरकार ने ही इन एजेंसियों को कोविड जांच का दायित्व सौंपा था। अब ये सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह इन एजेंसियों पर नजर भी रखती, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। अब रिजल्ट सबके सामने है। पूरे कोरोना काल में जितने भी लोगों की मृत्यु हुई है, उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। अभी जो फर्जीवाड़ा सामने आया है। कांग्रेस उसकी सीबीआई जांच की मांग करती है।
प्रदेश अध्यक्ष भाजपा मदन कौशिक ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा, ‘मैंने रिपोर्ट नहीं पढ़ी, लेकिन यदि ऐसा कोई मामला है तो इसका संज्ञान लेते उचित जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।’

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