‘फूलों की घाटी’ को खतरे में ढकेल रहे वन अधिकारी!

बाड़ ही बनी खेत की दुश्मन

  • घंगरिया में 2.102 हेक्टेयर की वन भूमि पर गांव के 49 स्थानीय लोगों ने किया कब्जा किया
  • यहां पर दुकानें, होटल और रेस्तरां खोलकर धड़ल्ले से बिजनस चला रहे हैं स्थानीय लोग
  • पिछले साल नवंबर में वन विभाग ने जमीन खाली करने का नोटिस देकर हाथ झाड़े
  • वन विभाग के सफेद हाथी बने उन अफसरों के रवैये पर उठे सवाल, जिनकी लापरवाही बनी खतरा
  • उठ रहे सवाल , बिना शह के घंगरिया में कैसे इतने बड़े पैमाने पर बन गया कंक्रीट का जंगल

देहरादून। गढ़वाल मंडल में स्थित खूबसूरत फूलों की घाटी में वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन दिनों अवैध कब्जों की बाढ़ आई हुई है। इस घाटी से जुड़ा घंगरिया फॉरेस्ट रिजर्व एरिया है, लेकिन कुछ सालों में यहां बड़ी संख्या में कंक्रीट इमारतें बनकर तैयार हो गई हैं, जहां रेस्तरां और होटल चलाए जा रहे हैं। दूसरी ओर वन विभाग के ‘काबिल’ अधिकारियों ने इन होटलों और रेस्तरां चलाने वाले लोगों को पिछले साल नोटिस देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली और अब तक पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिससे वहां अवैध रूप से काबिज हुए लोगों के हौसले बुलंद हैं। जिसका खमियाजा फूलों की घाटी को उठाना पड़ रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक घंगरिया में 2.102 हेक्टेयर वन भूमि पर गांव के 49 लोगों ने कब्जा किया है। वे यहां पर दुकानें, होटल और रेस्तरां खोलकर बैठे हैं। इससे पहले पिछले साल नवंबर में वन विभाग ने उन्हें नोटिस देकर जमीन खाली करने को कहा था, लेकिन उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। मामला सुर्खियों में छाने के बाद वन विभाग ने सभी 49 ग्रामीणों के नाम अखबार में छपवाये और उन्हें 29 जून तक जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया। हालांकि यह नोटिस भी बेअसर रही।
घंगरिया में लॉज मालिक दिनेश झिंगवन का भी नाम दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह जमीन ग्रामीणों की है और वे यहां पर कई सालों से व्यापार कर रहे हैं। घंगरिया पारिस्थितिकीय रूप से काफी नाजुक क्षेत्र है और जुलाई 2005 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का तमगा मिल चुका है। इस क्षेत्र में अलग-अलग किस्म की वनस्पतियों पाई जाती हैं। कई तरह के जीव-जंतुओं का यह निवास स्थान है। यहां स्नो लेपर्ड, हिमालयन हिरण के साथ ही कई दुर्लभ पौधों की प्रजातियां हैं। जिनमें दुर्लभ औषधियां और फूल शामिल हैं। घंगरिया न सिर्फ फूलों की घाटी का गेटवे है, बल्कि यहां सिखों का पवित्र तीर्थ स्थान हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा भी है। ऐसे में वन विभाग के सफेद हाथी बने उन अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं जिनकी लापरवाही से घंगरिया में इतने बड़े पैमाने पर कंक्रीट का जंगल बन गया और वे आंख और कान बंदकर कुंभकर्णी नींद में सोते रहे।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here