आखिरकार पायलट समेत तीन मंत्रियों को किया बर्खास्त

सियासत का चक्रव्यूह

  • जयपुर में 2 दिन में 2 बार विधायक दल की बैठक हुई, नहीं पहुंचे सचिन पायलट और उनके विधायक
  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का 109 विधायक होने का दावा, कहा- उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं
  • उधर पायलट खेमे ने कहा- हमारे पास 30 से ज्यादा विधायक, गहलोत सरकार साबित करे बहुमत
  • राहुल और प्रियंका गांधी ने भी संपर्क साधा, लेकिन  समझौते के लिए राजी नहीं हुए पायलट

जयपुर। आज मंगलवार को पांचवें दिन भी राजस्थान में गहलोत सरकार पर छाया संकट बरकरार है। कल सोमवार को दिनभर सियासी ड्रामा चलता रहा। आज भी हालात वैसे ही बने हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक विधायक दल की बैठक आज मंगलवार सुबह 10:30 बजे होनी थी, लेकिन यह एक घंटे देरी से 11:30 बजे शुरू हुई। बताया गया कि बगावत पर उतरे उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों का इंतजार किया गया। इससे पहले पायलट को इस बैठक के लिए न्योता भेजा गया था। हालांकि पायलट खेमे ने फिर आने से इनकार कर दिया। बैठक में शामिल नहीं हुए विधायकों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तहत इन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। सभी विधायकों ने एकमत से सचिन पायलट समेत तीन मंत्रियों को बर्खास्त करने पर सहमति जताई। पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटाए जाएगा।
इसके पहले सीएम आवास पर सोमवार को दोपहर एक बजे विधायक दल की बैठक हुई थी। इसमें भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की गई थी कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले विधायकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और बर्खास्त किया जाए। सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट अब गहलोत के साथ काम नहीं करना चाहते। उन्होंने अपनी यह मंशा कांग्रेस के सीनियर नेताओं के साथ बातचीत में जाहिर कर दी है।
राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने मंगलवार सुबह विधायक दल की बैठ्क के पहले कहा कि हम सचिन पायलट को दूसरा मौका दे रहे हैं, उनसे आज की विधायक दल की बैठक में भाग लेने के लिए कहा। मुझे उम्मीद है कि आज सभी विधायक आएंगे और नेतृत्व को एकजुटता देंगे, जिसके लिए राजस्थान के लोगों ने मतदान किया, हम सभी राज्य के विकास के लिए काम करना चाहते हैं।
राज्य के खाद्य और आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘वे इस संकट में सचिन पायलट के साथ खड़े हैं।’ राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा, ‘कांग्रेस दावा कर रही है कि उनके नेता एकजुट हैं, लेकिन यह साफ है कि उनके बीच आंतरिक विवाद है। इसलिए पायलट पार्टी छोड़ रहे हैं। अभी हमने फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं की है।
गहलोत ने कराई थी अपने विधायकों की परेड : इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने विधायकों की परेड कराई थी। इस दौरान, उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुमत (101 विधायक) से ज्यादा 109 एमएलए हैं। वहीं पायलट ने सोमवार शाम अपने विधायकों का वीडियो जारी किया। कहा कि उनके पास 19 विधायक हैं। हालांकि वीडियो में 17 विधायक नजर आए। खेमे ने कहा कि गहलोत सरकार अल्पमत में है। फ्लोर टेस्ट कराए। गहलोत खेमे के विधायक जयपुर के पास कूकस के फेयर माउंट होटल में ठहरे हैं। तो वहीं पायलट खेमे के विधायक हरियाणा के मानेसर में रुके हैं।
उधर कांग्रेस पायलट को मनाने में जुटी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा पी. चिदंबरम और केसी वेणुगोपाल ने उनसे संपर्क साधा था। कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पायलट समझौते को राजी नहीं हुए। उन्होंने राहुल गांधी के साथ मुलाकात से भी इनकार कर दिया। हालांकि सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि पायलट ने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष चार शर्तें रखी हैं। इनमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद बरकरार रखने के अलावा गृह और वित्त विभाग दिए जाने की मांग भी शामिल है। उधर पायलट सीधे कुछ बोलने और ट्‌वीट करने के बजाय करीबियों से बयान दिला रहे हैं, ताकि पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए उन पर कोई कार्रवाई न हो सके।  बैठक में न पहुंचने वाले कांग्रेस के 22 विधायक : सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पीआर मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत।
निर्दलीय विधायक : सुरेश टांक, ओम प्रकाश और खुशवीर सिंह जोजावर।

राजस्थान विधानसभा की मौजूदा स्थिति  
पार्टी           विधायकों की संख्या
कांग्रेस              107
भाजपा               72
निर्दलीय             13
आरएलपी             3
बीटीपी                 2
लेफ्ट                    2
आरएलडी              1
कुल सीटें            200
राजस्थान की विधानसभा में दलीय स्थिति को देखें तो कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं। सरकार को 13 में से 10 निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकदल के विधायक का भी समर्थन है। लिहाजा गहलोत के पास 118 विधायकों का समर्थन है। उधर भाजपा के पास 72 विधायक हैं। बहुमत जुटाने के लिए कम से कम 29 विधायक चाहिए।

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