देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बारिश ने तबाही मचाई हुई है। जगह-जगह सड़कें बंद हैं। बारिश कहर बनकर बरस रही है। पहाड़ से लेकर मैदान तक हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों में जहां लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ दरक रहे हैं और जमीन धंस रही है तो वहीं मैदानी इलाकों में नदियां कहर बरपा रही हैं। लोग जलभराव और बाढ़ के कारण परेशान हैं।

प्रदेश में बारिश और विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण दो महीने में 78 लोगों की जान गई। जबकि 47 लोग घायल हुए हैं, वहीं 18 अब भी लापता हैं। बता दें कि इसमें से सबसे ज्यादा मौतें भूस्खलन के कारण हुई हैं। 80 प्रतिशत सेभी ज्यादा मौतें भूस्खलन के कारण हुई हैं।

भारी बारिश के कारण प्रदेश को अभी तक करीब 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है, सड़कें और पुल टूटने से अभीतक 506 करोड़ रुपए की संपत्ति पानी में बह गई है। इसके अलावा कई मार्ग पिछले एक हफ्ते से बंद पड़े हुए हैं, जिन्हें खोलने में संबंधित विभाग के पसीने छूट रहे हैं। भारी बारिश का असर पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ा है। सड़कें बंद होने की वजह से पर्यटक पहाड़ों का रुख नहीं कर रहे हैं।

इस बार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के कारण सरकार और वैज्ञानिक दोनों चितिंत हैं। क्योंकि इस बार मानसून सीजन खत्म होने में अभी एक महीने से भी ज्यादा का समय बचा है। लेकिन अब प्रदेश में पिछले साल की तुलना में लगभग पांच गुना ज्यादा भूस्खलन हुआ है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की ओर से जारी डाटा के मुताबिक साल 2022 में भूस्खलन की 245 घटनाएं हुई थी जबकि इस साल 1,123 भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं।

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