चुनाव लोकसभा का, दांव पर विधायक!

सियासी शतरंज

  • विधायकों के ‘काम’ और ‘नाम’ की भी होने जा रही अग्निपरीक्षा 
  • इसमें खरा उतरने के लिये सभी विधायक अपने—अपने क्षेत्र में जी जान से जुटे 
  • अपने क्षेत्र में अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में अपने बराबर वोट दिलाने का दबाव 

देहरादून। देवभूमि में हर लोकसभा क्षेत्र में 14 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस लोकसभा चुनाव में सभी विधायकों पर उनके अपने क्षेत्र में अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में कम से कम उतने प्रतिशत वोट डलवाने का दबाव बना हुआ है जितने प्रतिशत मत उन्हें खुद मिले थे। इससे उनकी लोकप्रियता (नाम) और क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों (काम) की अग्निपरीक्षा होनी है। इसमें खरा उतरने के लिये सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्र में जी जान से जुटे हैं। उदाहरण के तौर पर नैनीताल लोकसभा सीट पर इस बार प्रत्याशियों से ज्यादा भाजपा विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वर्ष 2014 के चुनाव में जिन सीटों पर भाजपा को बंपर वोट मिले थे, उन सीटों पर पिछली बार से वोट प्रतिशत कम हुआ तो विधायक के काम और प्रतिष्ठा दोनों को कम करके आंका जायेगा। नैनीताल लोकसभा सीट पर पिछली बार 11.01 लाख वोट पडे पड़े थे। जिनमें सबसे ज्यादा भाजपा को 6.35 लाख तो कांग्रेस को 3.51 लाख और बसपा को 59 हजार के करीब वोट मिले थे। भाजपा को सभी सीटों पर भारी बढ़त मिली थी। जिसमें रुद्रपुर में भाजपा को 74 हजार तो कांग्रेस को सिर्फ 23 हजार वोट पर ही संतोष करना पड़ा था। इसी प्रकार नैनीताल लोकसभा क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्र गदरपुर में भाजपा को 51 हजार तो कांग्रेस को 30 हजार, लालकुआं में 47 हजार भाजपा तो कांग्रेस को 16 हजार, भीमताल में भाजपा को 30, कांग्रेस को 21 हल्द्वानी में भाजपा को 40 हजार कांग्रेस को 35 हजार, कालाढूंगी में भाजपा को 63 हजार व कांग्रेस को 20 हजार, जसपुर में भाजपा को 37 हजार व कांग्रेस को 31 हजार वोट मिले थे। इसी प्रकार काशीपुर में भाजपा को 55 हजार व कांग्रेस को 29 हजार, बाजपुर में भाजपा को 44 हजार व कांग्रेस को 32 हजार, किच्छा में भाजपा को 42 हजार व कांग्रेस को 26 हजार, सितारगंज में भाजपा को 42 हजार व कांग्रेस को 22 हजार, नानकमत्ता में भाजपा को 40 हजार व कांग्रेस को 22 हजार, खटीमा में भाजपा को 36 हजार तो कांग्रेस को 22 हजार के करीब मत प्राप्त हुए थे। पिछली बार बाजपुर, नैनीताल, लालकुआं में कांग्रेस विधायक थे। बाकी जगह पर स्थिति पहले जैसी है। पिछली बार भाजपा और कांग्रेस में हल्द्वानी, खटीमा, जसपुर में ही कुछ मुकाबले के आसार बने थे। इस बार क्या होगा, यह मतदान के बाद ही पता चल पायेगा, लेकिन कोई बड़ा उलटफेर होता है तो इसका उस क्षेत्र के विधायकों के सिर पर ही फोड़ा जाएगा, इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही।

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