चीनी जनरल ने दिया था भारतीय जवानों पर हमले का आदेश!

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावा

  • भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई ह‍िंसक झड़प के बारे में बड़ा खुलासा
  • भारतीय सैनिकों पर हमले के जरिए ‘भारत को सबक सिखाना चाहते थे’ चीनी जनरल झाओ
  • चीनी राष्ट्रपति ‘शी जिनपिंग को भी निश्चित रूप से थी इस आदेश के बारे में जानकारी’
  • भारत-चीन तनाव के बीच आज लेह का दौरा करेंगे सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे

वॉशिंगटन। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में गलवान घाटी हमले को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के जनरल ने भारतीय सैनिकों को ‘सबक’ सिखाने के लिये अपने सैनिकों को गलवान घाटी में उन पर हमले का आदेश दिया था। इस हमले में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद से ही भारत और चीन के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गये हैं।
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पश्चिमी थियेटर कमांड के प्रमुख जनरल झाओ जोंगकी ने गलवान घाटी हमले को मंजूरी दी थी। जनरल झाओ उन कुछ गिने चुने वरिष्‍ठ जनरल में शामिल हैं जो पीएलए में अभी भी सेवा दे रहे हैं। झाओ ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि भारत, अमेरिका और उसके सहयोगियों के शोषण से बचने के लिए चीन को कमजोर नहीं दिखना चाहिए।
गौरतलब है कि झाओ पहले भी भारत के साथ हुए गतिरोध पर अपनी नजर रखते रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि झाओ भारतीय सैनिकों पर हमले के जरिए ‘भारत को सबक सिखाना चाहते थे।’ अमेरिका की यह खुफिया रिपोर्ट चीन के उस दावे के उलट है जो वह पिछले कुछ दिनों से दावा कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों पर हमला किया था।
अमेरिकी रिपोर्ट से यह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि चीन इस हमले के जरिए भारत को अपनी ताकत का संदेश देना चाहता था। हालांकि चीन की यह योजना उल्‍टी पड़ गई और इस हिंसक झड़प में उसके 40 से ज्‍यादा सैनिक हताहत हो गए। दरअसल चीन चाहता था कि इस कार्रवाई के जरिए भारत पर दबाव बनाया जाए ताकि वार्ता की मेज पर भारतीय पक्ष को दबाया जा सके।
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की योजना इसलिए भी फेल रही कि भारत अब अमेरिका के पाले में जाता दिख रहा है। अमेरिका लंबे समय से ही भारत पर हुवावे को 5जी का ठेका न देने के लिए दबाव डाल रहा था। इस हमले के बाद अब भारत में लोग बड़ी संख्‍या में चीनी एप टिकटॉक को हटा रहे हैं।
सूत्रों ने कहा, ‘चीन जो चाहता था, उसके ठीक उल्‍टा हुआ। यह चीनी सेना के लिए जीत नहीं है।’ खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस खूनी चीनी हमले के फैसले में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग किस हद तक शामिल थे, इसके बारे में अभी स्‍पष्‍ट नहीं है। उधर चीनी सेना के विशेषज्ञों का कहना है कि शी जिनपिंग को निश्चित रूप से हमले के आदेशों के बारे में जानकारी होगी। अमेरिका का मानना है कि जनरल झाओ ने इस हमले में मारे गए चीनी सैनिकों की याद में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। हालांकि इस बारे में चीनी मीडिया में कुछ भी जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई। हालांकि चीन के सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी इस हार के बारे में काफी आलोचना की गई, जिसे बाद में सेंसर कर दिया गया।
ऐसा नहीं है कि जनरल झाओ की योजना पहली बार उल्‍टी पड़ी है। अमेरिकी अनुमान के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान जनरल झाओ पीएलए में थे और माना जाता है कि उनके कुप्रबंधन से विवाद काफी बढ़ गया था। वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान भी जनरल झाओ शामिल थे। इस दौरान भारतीय सैनिकों ने सफलतापूर्वक चीनी सैनिकों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था।

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