चमोली के राहुल ने किया नाम रोशन

होनहार बिरवान के होत चिकने पात

  • बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित परीक्षा में दूसरे स्थान पर रहे राहुल
  • बास्केटबॉल फेडरेशन की ओर से राहुल को दिया गया है सबसे यंगेस्ट आफीशियल का दर्जा
  • चमोली के घेस गांववासी राहुल के पिता लक्ष्मण बिष्ट गढ़वाल राइफल की 12वीं बटालियन में सूबेदार

देहरादून। लैंसडौन के आर्मी पब्लिक स्कूल के हेड ब्वॉय रह चुके राहुल बिष्ट ने अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित बास्केटबॉल रेफरी की पैनल बी की परीक्षा में दूसरा स्थान पाकर चमोली का नाम रोशन किया है। बास्केटबॉल फेडरेशन की ओर से राहुल को सबसे यंगेस्ट आफीशियल का दर्जा दिया गया है।
बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से पिछले वर्ष आयोजित परीक्षा में पूरे देश से 38 बच्चे रेफरी के लिए उत्तीर्ण हुए हैं। जिसमें पहला स्थान कर्नाटक के मोहन कुमार को मिला है जबकि उत्तराखंड के राहुल बिष्ट को दूसरा स्थान मिला है। तीसरे स्थान पर कर्नाटक के महेश कुमार रहे। इस परीक्षा में देशभर के डेढ़ सौ से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया था। राहुल मूल रूप से जनपद चमोली के सुदूर ग्राम घेस के निवासी है और उनके पिता लक्ष्मण सिंह बिष्ट गढ़वाल राइफल की 12वीं बटालियन में सूबेदार हैं।
राहुल की शिक्षा लैंसडौन के आर्मी पब्लिक स्कूल से हुई और वह स्कूल के हेड ब्वॉय भी रहे। वह वर्तमान में देहरादून में मैसेज और उत्तराखंड बास्केट बॉल फेडरेशन की टेक्निकल कमेटी में ऑफिशियल के रूप में काम कर रहे हैं। बास्केटबॉल में उनकी प्रतिभा को देखते हुए स्टेट सेक्रेटरी मनजीत ग्रेवाल में उन्हें नेशनल के पैनल भी परीक्षा में भाग लेने के लिए भेजा। राहुल ने परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। वह सेना में अपनी सेवाएं देने के साथ ही बास्केटबॉल को और बढ़ावा देना चाहते हैं। राहुल बास्केटबॉल के नेशनल खिलाड़ी भी रह चुके हैं और फुटबॉल के भी अच्छा खिलाड़ी है। इसके अलावा शूटिंग में शूटिंग में राज्य स्तर पर भी वह प्रतिभाग कर चुके हैं। वह देहरादून के कई स्कूलों में बास्केटबॉल का प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनकी इस सफलता से उनके पैतृक गांव घेस में जश्न का माहौल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here