ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में उन्नत वेसल सीलिंग उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। इस मामले में सीबीआई ने सात नामजद सहित एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों में एम्स का एक प्रोफेसर भी शामिल है। बुधवार को सीबीआई ने आरोपियों के ठिकानों पर दबिश भी दी। ऋषिकेश में एम्स के प्रोफेसर समेत एक अन्य आरोपी के घर में भी दबिश दी गई।

इस मामले में 21 अगस्त को अपराध निरोधक शाखा देहरादून के एडिशनल एसपी सतीश कुमार राठी ने मुकदमा दर्ज कराया है। जिसमें बताया गया कि उपकरण खरीद में भारी वित्तीय अनियमितता की शिकायत के बाद सीबीआइ, अपराध निरोधक शाखा तथा एम्स के अधिकारियों ने 31 मार्च 2023 को जांच की थी। जिसमें पता चला कि एम्स ऋषिकेश में उन्नत वेसल सीलिंग उपकरण की खरीद के लिए आठ जनवरी 2019 से 22 फरवरी 2019 के बीच टेंडर प्रक्रिया की गई थी। जिसमें एम्स ऋषिकेश में कार्यरत माइक्रोबायोलाजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर बलराम जी ओमर को खरीद अधिकारी और समन्वयक नियुक्त किया गया था।

सीबीआइ जांच में यह बात सामने आई कि एम्स ऋषिकेश ने निविदा शर्तों को ताक पर रखते हुए कम बोली लगाने वाली आरोग्य इंटरनेशनल कंपनी से सात उन्नत वेसल सीलिंग उपकरण 55,38,312.70 रुपये प्रति यूनिट की दर से कुल 38,76,8188.93 रुपए में क्रय किए। जबकि कुछ वर्ष पूर्व एम्स ने यही उपकरण 19,92,480 की दर से खरीदा था। इस तरह इस पूरी खरीद में एम्स को 6 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया।

इस मामले में जांच में दोषी पाए जाने पर एम्स के माइक्रोबायोलाजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बलराम जी ओमर , मैसर्स आरोग्य इंटरनेशनल, सेंट्रल मार्केट, प्रशांत विहार, नई दिल्ली और उसके साझेदार सुमन वर्मा व विश्ववीर वर्मा निवासी पीतमपुरा, नई दिल्ली साथ ही मैसर्स रिया एजेंसीज, ट्रांसपोर्ट नगर, जोधपुर, राजस्थान और उसके पार्टनर निखिल कुमार निवासी महादेव रोड, नई दिल्ली, आदित्य कुमार सिंह निवासी जगसरा,हरदोई, उत्तर प्रदेश व एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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