एनकाउंटर या मर्डर : ‘पुलिस स्टोरी’ में छेद ही छेद!

सोचा-समझा सरेंडर, सवाल उठाता एनकाउंटर

  • जिस विकास को उज्जैन में निहत्थे गार्ड ने पकड़ा था, वह हथियारबंद प्रशिक्षित कमांडो से पिस्टल छीनकर कैसे भागा
  • बीते एक हफ्ते में विकास दुबे के पांच गुर्गों का पुलिस कर चुकी है एनकाउंटर और विकास दुबे का भी तय था
  • पुलिस के काफिले में 10 गाड़ियां थीं और एक्सीडेंट सिर्फ उसी गाड़ी का हुआ जिसमें विकास सवार था?

कानपुर। बीते एक हफ्ते में विकास दुबे के पांच गुर्गों का एनकाउंटर हो चुका था। विकास दुबे का भी तय था, लेकिन वह खुद सरेंडर करने उज्जैन आ गया। आज शुक्रवार सुबह कानपुर से महज 17 किमी दूर उसका एनकाउंटर कर दिया गया। जैसे विकास दुबे की गिरफ्तारी से सवाल उठे थे, इसी तरह इस एनकाउंटर से भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

दिनभर चार्टर्ड प्लेन की खबरें थीं, फिर सड़क के रास्ते कैसे ले जाया गया?
पहले चर्चा थी कि विकास को चार्टर्ड प्लेन के जरिए उज्जैन से इंदौर और फिर वहां से यूपी ले जाया जाएगा, लेकिन गुरुवार शाम को अचानक कहा गया कि उसे सड़क के रास्ते ले जाया जाएगा और इसके लिए यूपी एसटीएफ की टीम आ रही है, लेकिन एसटीएफ की टीम आई ही नहीं। शाम को उज्जैन से एमपी पुलिस की टीम विकास को झांसी तक ले गई।

पुलिस के काफिले में कई गाड़ियां थीं, एक्सीडेंट सिर्फ उसी गाड़ी का हुआ जिसमें विकास सवार था?
विकास को जब झांसी में एमपी पुलिस ने यूपी पुलिस के हवाले किया, तब वहां 10 से ज्यादा गाड़ियां तैयार थीं। इसमें से एक गाड़ी में विकास को बैठाया गया। बाकी गाड़ियां आगे-पीछे थीं। मीडिया भी इस काफिले का पीछा कर रहा था। भारी बारिश हो रही थी। इस पूरे काफिले में एक्सीडेंट सिर्फ विकास की गाड़ी का हुआ। पुलिस की बाकी किसी गाड़ी या मीडिया की किसी गाड़ी के साथ हादसा नहीं हुआ।

एनकाउंट करने से पहले मीडिया को जानबूझकर रोका गया?
आरोप है कि काफिले के साथ चल रही मीडिया की गाड़ियों को रोकने के लिए बीच में अचानक चेक पोस्ट लगा दी गई। इस वजह से मीडिया की गाड़ियां वहीं रोक दी गईं। बाद में खबर आई कि विकास दुबे जिस गाड़ी में था, वह पलट गई और उसका एनकाउंटर हो गया। एनकाउंटर के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस के आला अफसरों ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या मीडिया को रोकने के लिए ही अचानक चेकिंग शुरू की गई थी? विकास दुबे मुठभेड़ से पहले मीडिया की गाड़ियों को क्यों रोका?
गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर पर उठते सवाल के बीच नया विडियो सामने आया है। वीडियो के मुताबिक मीडिया की गाड़ियों को एनकाउंटर वाली जगह से पहले ही रोक दिया गया था। बताया जा रहा है कि मीडिया की गाड़ी को रोकने के बाद पुलिस का काफिला आगे बढ़ा और थोड़ी ही दूरी पर ‘एक्सीडेंट’ हुआ और फिर ‘एनकाउंटर’ हो गया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कानपुर के सचेंडी इलाके में पुलिस ने मीडिया को रोक दिया था।

उम्मीद है विकास दुबे कानपुर ना पहुंचे…पुलिस अफसर का वीडियो सामने
विकास दुबे एनकाउंटर पर अब सवाल उठ रहे हैं। एक ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठा है। इसमें एक पुलिस अफसर दूसरे पुलिस वाले से कहता सुनाई दे रहा है… ‘उम्मीद है विकास दुबे कानपुर सुरक्षित नहीं पहुंचे।’ वीडियो उज्जैन के एडिशनल एसपी का बताया जा रहा है। इसमें पुलिस वाला ही उनसे पूछ कहा है कि विकास दुबे कानपुर पहुंचेगा ना? इस पर अधिकारी हंसते हुए यह जवाब देते हैं कि उम्मीद है कि वह ना पहुंचे। विकास दुबे का आज शुक्रवार सुबह कानपुर में एनकाउंटर हो गया।

बीच सफर में कैसे बदल गई विकास दुबे की गाड़ी? उठ रहे सवालविकास बैठा सफारी में था। हॉस्पिटल भी उसे सफारी में लाया गया तो आखिर कार बदली कब गई? अब गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर में कार एक्सीडेंट वाली ‘थ्योरी’ पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल उज्जैन से विकास को जिस गाड़ी में लाया जा रहा था वह टाटा सफारी थी। रास्ते में भी जब मीडिया के लोगों ने उसे देखा तो वह टाटा सफारी में ही बैठा था। सुबह हॉस्पिटल भी उसे सफारी में भी लेकर जाया गया। वहीं सुबह जिस कार का एक्सीडेंट हुआ वह महिंद्रा की TUV-300 कार है। ऐसे में पुलिस के इस दावे पर सवाल है कि विकास दुबे उस कार में बैठा था जिसका एक्सीडेंट हुआ जबकि पूरे रास्ते में वह दूसरी कार में दिख रहा है।

विकास के साधी प्रभात को मुठभेड़ मारने की भी पुलिस ने सुनाई थी यही कहानी
पुलिस की कहानी के अनुसार 9 जुलाई को फरीदाबाद से प्रभात को ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर पुलिस लेकर आ रही थी, तभी प्रभात जिसके पैर में गोली लगी थी और वह चलने से भी लाचार था, अचानक पुलिस की पिस्टल छीनकर ‘भागने’ लगा। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। बिकरू गांव निवासी प्रवीण उर्फ बउवा को भी पुलिस ने ढेर कर दिया।

विकास को हथकड़ी नहीं लगाई थी?
यह भी बड़ा सवाल है कि जिस पर 60 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हों, जो 8 पुलिसवालों की हत्या का आरोपी हो, उसे गाड़ी में क्या हथकड़ी पहनाकर नहीं बैठाया गया था? उज्जैन के महाकाल मंदिर के निहत्थे गार्ड ने विकास को रोका था। कहा गया था कि गार्ड के साथ हाथापाई भी हुई, लेकिन विकास भाग नहीं सका। उसे पकड़ने वाली उज्जैन पुलिस के पास लाठी तक नहीं थी। वहीं कानपुर के पास जब पुलिस की गाड़ी पलट गई तो विकास ने कैसे हथियारबंद कमांडो से पिस्टल छीन ली और फायरिंग करने लगा?

कौन-से बड़े खुलासे करने वाला था विकास दुबे?
इस बारे में पूछे जाने पर यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने बताया था कि विकास से पूछताछ की जाए तो बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे। इसमें आईएएस, आईपीएस, नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं। विकास का उज्जैन में पकड़ा जाना समझ से बाहर है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा- जिसका शक था, वही हो गया। विकास दुबे का किन-किन राजनीतिक लोगों, पुलिस अधिकारियों से संपर्क था, अब यह उजागर नहीं हो पाएगा। सभी एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?

क्या इस मुठभेड़ की जांच होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में पुलिस एनकाउंटरों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। हर एनकाउंटर की जांच जरूरी है। जांच खत्म होने तक इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को प्रमोशन या वीरता पुरस्कार नहीं मिलता। एनकाउंटर आमतौर पर दो तरह के होते हैं। पहला, जिसमें कोई अपराधी पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश करता है। दूसरा, जब पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने जाती है और वो जवाबी हमला कर देता है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार, सीआरपीसी की धारा 176 के तहत हर एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जांच जरूरी है। पुलिस को हर मुठभेड़ के बाद इस्तेमाल किए गए हथियार और गोलियों का हिसाब देना होता है।
पुलिस को एनकाउंटर का अधिकार नहीं है। सिर्फ खुद की हिफाजत का अधिकार है। अपराधी से खुद की जान बचाने के लिए पुलिसकर्मी गोली चलाता है और उसमें कोई अपराधी मारा जाता है तो इसे साबित करना भी जरूरी है।

उज्जैन में गिरफ्तारी क्या स्क्रिप्टेड थी?
विकास दुबे 4 राज्यों से गुजरते हुए 1250 किमी का सफर तय कर उज्जैन कैसे पहुंचा था, यह सस्पेंस बना हुआ है। उज्जैन में उसकी गिरफ्तारी पर भी सवाल उठे। एक दिन पहले यानी बुधवार दोपहर को उज्जैन के महाकाल थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी का तबादला हुआ। रात को कलेक्टर आशीष सिंह और एसपी मनोज सिंह महाकाल मंदिर पहुंचे थे। दाेनाें का दावा है कि वे एक बैठक के सिलसिले में गए थे।

उज्जैन पुलिस ने गांधीगीरी दिखाई?
गुरुवार सुबह विकास दुबे मंदिर में टहलकर फाेटाे खिंचवाता रहा। यहां पुलिस की गांधीगीरी दिखाई दी। विकास खुद ही मंदिर से बाहर आया, पुलिस वाले पीछे चलते रहे। मीडिया आया, तब उसे गर्दन पकड़कर दबोचा गया। किसी पुलिसवाले के हाथ में डंडा तक नहीं था। मंदिर के अंदर विकास के फोटो-वीडियो कौन बनाता रहा, ये कोई नहीं जानता। जब विकास को पकड़ा गया तो एक पुलिस वाले को बोलते सुना गया कि शर्माजी मरवाओगे। विकास भी पीछे मुड़कर बार-बार देखता रहा। जैसे किसी को खोज रहा हो।

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