Women Reservation Bill: संसद और विधानसभा में उत्तराखंड की महिलाओं की भागीदारी कितनी बढ़ेगी, जानिए 

देहरादून। देश में महिलाओं की आबादी 48 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन राजनीति में संसद और विधानसभाओं में इनकी हिस्सेदारी नाममात्र की है। इसी भागीदारी को बढ़ाने के लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के मकसद से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।

संसद में महिला आरक्षण बिल पेश होने से उत्तराखंड में महिलाओं में खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। कैबिनेट में महिला आरक्षण बिल को मंजूरी देने के बाद भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की करें तो उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी महिलाओं की बड़ी भूमिका थी जिसकी वजह से उत्तराखंड राज्य मिला है। राज्य आंदोलन में शामिल महिलाएं भी महिला आरक्षण बिल से खुश नजर आ रही हैं। बिल के लागू होने से प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।

भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आशा नौटियाल ने कहा, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के विधेयक को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा, इससे महिलाएं राजनीतिक तौर पर मजबूत होंगी। महिलाओं के लोकसभा और विधानसभा पहुंचना आसान होगा। उनके मुद्दे सर्वोच्च सदन में और मजबूती के साथ गूंजेंगे। 33 फीसदी आरक्षण मिलने से देश के सर्वोच्च सदन में महिलाओं के लिए 181 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में भी 70 में से 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।

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