कैलुवा बिनायक मंदिर में कृष्ण भक्तों ने मांगीं मनौतियां

  • जन्माष्टमी के पर्व पर इस पौराणिक मंदिर में भक्तों ने की पूजा अर्चना

थराली से हरेंद्र बिष्ट।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित मठ मंदिरों में से एक नंदा देवी राजजात यात्रा रूट पर स्थित कैलुवा बिनायक स्थित पौराणिक मंदिर में जन्माष्टमी के पर्व पर कृष्ण भक्तों ने पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगीं। हालांकि इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते कम ही भक्तों ने यहां पर पूजा अर्चना की।
देवाल विकास खंड के अंतर्गत श्री नंदा देवी राजजात यात्रा रूट के आखिरी आबादी क्षेत्र वांण गांव से दो पड़ाव आगे वेदनी बुग्याल से करीब 6 किलोमीटर आगे एवं रहस्यमयी रूपकुंड से करीब 4 किमी पहले कैलुवा बिनायक एक रोचक एवं विश्व के अद्भुत स्थानों में से एक हैं। तमाम चढ़ाई वाले मखमली बुग्यालों को पार कर यात्री और पर्यटक जब यहां पर एकदम खड़ी एवं दमघोंटू चढ़ाई को पार कर पहुंचते हैं तो यहां से चारों ओर दिखने वाले प्रकृति के अनमोल एवं अद्भुत नजारों को देखकर ठगे से रह जाते हैं।
गौरतलब है कि केवल 12 वर्षों अथवा जब भी नंदा देवी की राजजात यात्रा होती हैं। तभी यात्रा बेदनी बुग्याल से आगे पातरनचौनिया में रात्रि प्रवास के बाद ही बगवावासा पड़ाव को जाने से पहले कैलुवा बिनायक में विश्राम के लिए रुकती हैं। पातरनचौनिया से आगे एवं कैलुवा विनायक के बीच सीधी चढ़ाई पड़ती है।  करीब 14 हजार 200 फीट की ऊंचाई पर स्थित कैलुवा बिनायक के रास्ते के बीच आक्सीजन की कमी होने के कारण काफी संख्या में यात्रियों व ट्रेकरों को स्वास्थ्य के कारण वापस जाना पड़ता हैं। यहां पर भगवान गणेश का एक पौराणिक मंदिर के साथ ही पौराणिक पाषाण मूर्ति स्थापित हैं।
कैला बिनायक में जन्माष्टमी के पर्व पर भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर सुख शांति की मनौतिया मांगी जाती रही हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी के पर्व पर केलवा विनायक मंदिर में सच्चे मन से पूजा अर्चना करने वालों श्रद्धालुओं की मुराद पूरी होती है। जिसके चलते यहां प्रतिवर्ष इस पर्व पर विशेष पूजा अनुष्ठान का कार्यक्रम किया जाता है। जिसमें इस क्षेत्र में बहुतायत मात्रा में उगने वाले  ब्रह्म कमल के फूल अर्पित कर भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। यहां पर भगवान गणेश को  दूध और मक्खन का भोग लगाया जाता है।
इस साल भी आवादी क्षेत्र से करीब 15 किमी दूर बुग्यालों के बीच स्थित इस मंदिर में स्थानीय वांण, कुलिंग बलाण, पिनाऊ के साथ ही घाट ब्लाक के सुतोल, कनोल आदि गांवों के लोगों ने जन्माष्टमी के पर्व पर पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगी। वांण के हीरा सिंह गढ़वाली ने बताया कि इस बार कोरोना के कारण कम ही श्रद्धालु यहां पहुंचे। पिछले वर्षों तक रूपकुंड, होमकुंड़ की यात्रा पर जाने वाले सैकड़ों देशी विदेशी पर्यटक भी जन्माष्टमी के दिन यहां पर पूजा अर्चना करते थे, किंतु इस बार देशी विदेशी यात्री पूरी तरह से नदारद रहे।

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